चंबल की ये स्‍त्रियां- feminism से आगे की बात हैं

राजनैतिक रूप से लगातार उद्भव-पराभव वाले हमारे देश में कुछ निर्धारित हॉट टॉपिक्स हैं चर्चाओं के लिए। देश के सभी

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अकेली कविता कृष्‍णन ही क्‍यों…इस अराजकता के हम सभी साक्षी हैं

हमारे देश में जिन शब्‍दों को ब्रह्म माना गया, सोशल मीडिया पर या इंटरनेट की दुनिया ने उनको  धराशाई करने

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अकेली कविता कृष्‍णन ही क्‍यों…इस अराजकता के हम सभी साक्षी हैं

हमारे देश में जिन शब्‍दों को ब्रह्म माना गया, सोशल मीडिया पर या इंटरनेट की दुनिया ने उनको  धराशाई करने

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क्‍या आपने मृणाल पांडे का लेख पढ़ा?

क्‍या आपने मृणाल पांडे  का लेख पढ़ा? नहीं पढ़ा तो 29 मार्च के दैनिक जागरण का संपादकीय पृष्‍ठ पढ़  लीजिएगा।

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माता गांधारियों, जीजीजीजीजी क्रांति की संतानें अब इस कुरुक्षेत्र में क्या करेंगी?

अमेरिकी संसद कानून बना रही है आउटसोर्सिंग खत्म करने के लिए और हमारे बच्चों ने ज्ञान की खोज के बदले

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