कव‍िता: अर्धांगिनी…पानी की तरह फ़ितरत मेरी

क्यूँ बैर बनाए तू मुझसे इस हाल में भी तू खुश तो नहीं, मुझसे कह, मैं झुक जाती हूँ अभिमान

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