अहं को छोड़, ममकार के ज्वर से मुक्त होकर युद्ध कर: कपिल शर्मा

मयि सवीणिकर्माणि संन्यास्याध्यात्मचेतमा। निराशीर्निर्ममो भूत्वा युध्यस्व विगतज्वर: श्री कृष्ण कहते हैं कि अपनी चेतना (चित्त) को आत्मा के साथ युक्त

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जीवन अनमोल है परन्तु उसके लिए, जो इसे पहचान सके

बड़े भाग मानुष तन पावा | सुर दुर्लभ सद् ग्रन्थन्हि गावा || साधन् धाम मोक्ष कर द्वारा | पाई न

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