होलाष्टक 03 मार्च से, आठ दिनों तक सभी शुभ कार्य रहेंगे वर्जित

होलाष्टक को ज्योतिष की दृष्टि में एक होलाष्टक दोष माना जाता है जिसमें विवाह, गर्भाधान, गृह प्रवेश, निर्माण, आदि शुभ

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देवशयनी एकादशी से पूर्व मात्र तीन शुभ मुहूर्त, उसके बाद चातुर्मास

यदि किसी परिवार में शादी – ब्याह के लिए युवक-युवतियों का रिश्ता पक्का करना हो तो शीघ्र ही कर लें,

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अधिक मास में वर्जित माने गए हैं समस्त शुभ कार्य, देव कार्य तथा पितृ कार्य

प्रत्येक राशि, नक्षत्र, करण व चैत्रादि बारह मासों के सभी के स्वामी है, परंतु मलमास का कोई स्वामी नही है

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