हे बुद्ध‍ि श्रेष्ठो! ये चुप्पी आपके वज़ूद को भी म‍िटा देगी

कभी शायर व गीतकार शकील बदायूंनी ने लिखा था- काँटों से गुज़र जाता हूँ दामन को बचा कर फूलों की

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क्या इस शताब्दी के अंत तक इंसान का वजूद मिट जाएगा?

क्या इंसानों का वही हाल होने वाला है जो डायनोसोर का हुआ था? इस समय इंसान की नस्ल जलवायु परिवर्तन,

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