प्रत्यक्ष अनुभव: कल तक जो जितना भोग कर रहा था, आज वह उतना ही दुखी है

कस्यैकान्तं सुखम् उपनतं दु:खम् एकान्ततो वा | नीचैर् गच्छति उपरि च दशा चक्रनेमिक्रमेण || किसने मात्र सुख ही भोगा है

Read more