सहनशीलता, क्षमा, दया को तभी पूजता जग है…

क्रांतकारी कवि रामधारी सिंह ”दिनकर” ने कुरुक्षेत्र के तृतीय सर्ग के तीसरे भाग में लिखा है कि किस प्रकार न्याय

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