पहाड़ों की यातनाएं हमारे पीछे हैं, मैदानों की हमारे आगे

‘पहाड़ों की यातनाएं हमारे पीछे हैं, मैदानों की हमारे आगे.’ जर्मन कवि बर्तोल्त ब्रेख्त की यह काव्य पंक्ति मंगलेश डबराल

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