कभी चंदा कोचर ने ही कहा था, आसमानों की ख्वाहिश रखो लेकिन…

“आसमानों की ख्वाहिश रखो लेकिन धीमे-धीमे चलते हुए. रास्ते पर चलने वाले हर एक कदम का मज़ा लो. ये छोटे-छोटे

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