पद्मभूषण महाकवि गोपालदास नीरज की अस्थियां गंगा में विसर्जित

न जन्म कुछ, न मृत्यु कुछ बस इतनी सिर्फ बात है, किसी की आंख खुल गई, किसी को नींद आ

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