कठिन समय में अभिव्यक्ति के माध्यम ढूँढने होते हैं: राजेश जोशी

नई द‍िल्ली। अनिश्चितता में हम रोज़ कुछ निश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार, जरूरी व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने

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देशभर के सभी ”संरक्षित” मानसिक रोगियों को समर्पित

जिस तरह भोजन के लिए भूख… सोने के लिए नींद और रोने के लिए भावनाएं या संवेदनाएं होना जरूरी है,

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Next CJI ने कहा, कुछ लोगों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बहुत ज़्यादा

नई दिल्‍ली। सुप्रीम कोर्ट के अगले CJI (मुख्य न्यायाधीश) जस्टिस शरद अरविंद बोबडे ने एक अंग्रेजी अखबार को दिए गए

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“गूंगे” ने “बहरे” से जो कुछ कहा, उसे “अंधे” ने देखा

चकरा गए न! मैं भी इसी प्रकार चकरा गया था जब उसने बिना किसी राम-राम या दुआ-सलाम के सीधे-सीधे मुझसे

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