कोरोना की पहचान करने वाली टी-सेल्स, अब बढ़ा रहीं हैं इम्यून सिस्टम की मेमोरी

जर्नल साइंस में प्रकाशित रिसर्च से पता चला कि सर्दी से लड़ने वाली टी-सेल्स इम्यून सिस्टम की मेमोरी बढ़ा रहीं, ताकि ये कोरोनावायरस का मुकाबला कर सकें।
शरीर में होने वाला सर्दी का संक्रमण कोरोनावायरस को पहचानने में मदद कर कर सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि शरीर में पाई जाने वाली टी-सेल्स इम्यून सिस्टम की मेमोरी को इतना बढ़ा सकती हैं कि ये कोल्ड वायरस की तरह कोरोना को भी पहचान सकें और इससे लड़ सकें। कोरोना के कुछ मरीजों में संक्रमण के हल्के लक्षण दिख रहे हैं, इसका कारण यही टी-सेल्स हैं।

जर्नल साइंस में प्रकाशित शोध के मुताबिक, संक्रमण को रोकने के शरीर की टी-सेल्स अहम रोल निभाती हैं। ये टी-सेल्स आमतौर पर होने वाले कोल्ड वायरस से लड़ती हैं। रिसर्च में सामने आया है कि इन्हीं कोशिकाओं के कारण कुछ मरीजों में कोरोना के हल्के लक्षण नजर आ रहे हैं।

ऐसे पहचानी गई इनकी एक्टिविटी
शोधकर्ताओं के मुताबिक, रिसर्च में शामिल कुछ लोग ऐसे भी थे जिनमें कभी भी कोरोना का संक्रमण नहीं हुआ लेकिन उनमें टी-सेल्स काफी संख्या में बनीं। ये कोशिकाएं कोरोनावायरस के अलावा चार अन्य तरह के कॉमन कोल्ड कोरोनावायरस को भी पहचानने में सक्षम हैं। शरीर में वायरस पहुंचने पर ये कोशिकाएं उसे ट्रैक करके खत्म करने की कोशिश करती हैं।

इसलिए कोरोना के लक्षण हल्के दिखते हैं
रिसर्च करने वाले अमेरिका के ला जोला इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी के शोधकर्ता Daniela Viscope का कहना है कि हमने साबित किया है कि कुछ लोगों में पहले से मौजूद टी-सेल्स कोरोना से लड़ने में मदद करती हैं। यह रिसर्च इस बात को साबित करने में मदद करती है कि कुछ लोगों में कोरोना के हल्के लक्षण क्यों नजर आते हैं। ऐसे लोगों में ये कोशिकाएं कोरोना से लड़ रही होती हैं और वायरस अपना असर नहीं छोड़ पाता। इसलिए लक्षण हल्के दिखते हैं।

40 से 60 फीसदी मरीजों में बनीं टी-सेल्स
एक अन्य शोध में सामने आया कि जिन लोगों में कोरोनावायरस का संक्रमण कभी नहीं हुआ,ऐसे 40 से 60 फीसदी लोगों में टी-सेल्स अधिक संख्या में पाई गईं। यह रिसर्च कहती है कि ऐसे लोगों में इन कोशिकाओं ने इम्यून सिस्टम को पूरी तरह ट्रेंड कर दिया है। ऐसे लोगों का इम्यून सिस्टम कोरोनावायरस को पहचान सकता है। दिया है। नीदरलैंड्स, जर्मनी, सिंगापुर और ब्रिटेन में इसी विषय पर हुईं अलग-अलग रिसर्च में भी ऐसी ही बातें सामने आई हैं।

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