दिल्ली-एनसीआर में तेजी से फैल रहा है Swine flu

नई दिल्‍ली। दिल्ली-एनसीआर में Swine flu यानी H1N1 वायरस तेजी से फैल रहा है। नए साल का एक महीना भी नहीं हुआ है और राजधानी दिल्ली में 267 मामलों की पुष्टि हो चुकी है जबकि पिछले पूरे साल में 205 मामले सामने आए थे। एक जनवरी से अब तक आरएमएल हॉस्पिटल में Swine flu से 6 लोगों की जान जा चुकी है जबकि पिछले साल केवल दो लोगों की मौत हुई थी।
बता दें कि राजस्थान में स्वाइन फ्लू की स्थिति गंभीर है और वहां अब तक 70 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके साथ ही गुजरात के बड़ोदरा में पांच और उत्तराखंड में 13 लोगों के मौत की पुष्टि हुई है।
इस साल न सिर्फ Swine flu (H1N1) के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं बल्कि वायरस का खतरनाक रूप भी दिख रहा है। इलाज के बाद भी अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है। कई अलग-अलग प्राइवेट हॉस्पिटल में भी मौतें हुई हैं। हालांकि, नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (NCDC) की तरफ से जारी रिपोर्ट में अभी तक दिल्ली में एक भी मौत को आंकड़ों में शामिल नहीं किया गया है।
एनसीआर में सबसे ज्यादा मामले गुरुग्राम में
एनसीआर में भी Swine flu का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। सबसे ज्यादा केस गुरुग्राम में आए हैं, जहां 56 लोगों में इसकी पुष्टि हुई है। फरीदाबाद में 43 तो गाजियाबाद में स्वाइन फ्लू के 33 कन्फर्म मरीज सामने आ चुके हैं। नोएडा में 13 लोगों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। हालांकि इन शहरों में स्वास्थ्य विभाग ने इस साल इससे किसी की मौत की पुष्टि नहीं की है।
राजस्थान में स्वाइन फ्लू का कहर, अब तक 70 की मौत
राजस्थान में स्वाइन फ्लू से पीड़ित तीन और लोगों की शनिवार को मौत होने के साथ इस साल इस रोग से मरने वालों की संख्या बढ़ कर 70 हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार स्वाइन फ्लू के चलते शुक्रवार को पांच और शनिवार को तीन रोगियों की मौत हो गई। इस साल एक जनवरी से अब तक स्वाइन फ्लू से राज्य में 70 मौतें हो चुकी हैं। इस बीच राज्य भर में 84 और रोगियों में इस रोग की पुष्टि हुई है। इनमें जयपुर में 37, उदयपुर में 12, जोधपुर में 10 और बीकानेर में चार रोगी शामिल हैं। राज्य में अब तक कुल 1787 लोगों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को यहां चिकित्सा व स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा, विभाग के आला अधिकारियों तथा पुणे स्थित नेशनल इन्स्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की टीम के साथ हालात की समीक्षा की थी।
गुजरात के वड़ोदरा में 5 की मौत
गुजरात के वड़ोदरा में रविवार को एक 54 वर्षीय शख्स की मौत के साथ ही शहर में इस साल अबतक इस बीमारी से मरने वालों की संख्या बढ़कर 5 हो गई है। इसके अलावा तीन महिला और दो पुरुष H1N1 वायरस से पीड़ित पाए गए हैं। एक जनवरी से अबतक शहर में स्वाइन फ्लू के 40 मामले सामने आ चुके हैं।
उत्तराखंड में भी बरपा Swine flu का कहर
उत्तराखंड के उत्तरकाशी में एक 28 वर्षीय महिला की स्वाइन फ्लू से मौत हो गई। पिछले 25 दिनों में इस खतरनाक बीमारी से मरने वालों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। राज्य में अबतक 42 लोग स्वाइन फ्लू से पीड़ित पाए गए हैं।
स्वाइन फ्लू के लिए अनुकूल है अभी का मौसम
गंगाराम अस्पताल के डॉ अतुल गोगिया ने कहा कि अभी का मौसम स्वाइन फ्लू के लिए अनुकूल है इसलिए यह तेजी से फैल रहा है। चूंकि यह सांस से एक से दूसरे में फैलता है तो अगर किसी परिवार में एक को होता है तो पूरा परिवार इसका शिकार हो सकता है। इस बारे में एशियन हॉस्पिटल के रेसपिरेट्री डिपार्टमेंट के डॉ. मानव मनचंदा का कहना है कि यह वायरस साल में दो बार ऐक्टिव होता है- ठंड में और बारिश में। डॉक्टर ने कहा कि कुछ सालों से यह वायरस अब हमारे वातावरण में फैल चुका है। बहुत से लोगों में यह सामान्य इन्फ्लूएंजा की तरह बिहेव करता है और कई बार वायरस का स्ट्रेन ही बदल जाता है।
वैक्सीन से ही है बचाव संभव
डॉ. डी के दास ने कहा कि वायरस से बचना है तो वैक्सीन ही इलाज है, अभी रिस्क वाले मरीजों को वैक्सीन लगवा लेना चाहिए। डॉक्टर ने कहा कि एक बार वैक्सीन लगाने के बाद लगभग दो हफ्ते बाद यह इफेक्टिव होता है। उन्होंने कहा कि हेल्थ केयर प्रोवाइडर, 65 साल से अधिक उम्र के लोग, प्रेग्नेंट महिलाएं, डायबीटीज, अस्थमा के मरीज और एक साल से छोटे बच्चे को सबसे ज्यादा खतरा है, इसलिए जहां तक संभव है अभी भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। H1N1 मौसमी इन्फ्लुएंजा है
लक्षणों को पहचानिए
बुखार और खांसी, गला खराब, नाक बहना या बंद होना, सांस लेने में तकलीफ और बदन दर्द, सिर दर्द, थकान, ठिठुरन, दस्त, उल्टी, बलगम में खून आना इत्यादि स्वाइन फ्लू के सामान्य लक्षण हो सकते हैं। सरकार ने अलग-अलग कैटिगरी के वायरस के लिए अडवाइजरी जारी की है।
कैटिगरी-A
बुखार, खांसी, सर्दी, शरीर में दर्द होना व थकान महसूस होना माइल्ड स्वाइन फ्लू के लक्षण हैं। इसमें इलाज लक्षणों पर आधारित होता है। ऐसे लक्षणों में टैमीफ्लू दवा लेने की या जांच की जरूरत नहीं होती।
कैटिगरी-B
इस श्रेणी के मरीजों में माइल्ड स्वाइन फ्लू के लक्षणों के अलावा तेज बुखार और गले में तेज दर्द होता है या मरीज में माइल्ड स्वाइन फ्लू के लक्षणों के साथ, हाई रिस्क कंडीशन कैटिगरी है तो रोगी को स्वाइन फ्लू की दवा टैमीफ्लू दी जाती है। हाई रिस्क कैटिगरी में छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, 65 साल या उससे अधिक उम्र के व्यक्ति, फेफड़े की बीमारी, दिल की बीमारी, किडनी की बीमारी, डायबीटीज, कैंसर से पीड़ित लोग आते हैं।
कैटिगरी-C
इस श्रेणी के लोगों में स्वाइन फ्लू के ऊपर लिखे लक्षणों के अतिरिक्त ये गंभीर लक्षण भी मिलते हैं जैसे सांस लेने में दिक्कत, छाती में तेज दर्द, गफलत में जाना, ब्लड प्रेशर कम होना, बलगम में खून आना, नाखून नीले पड़ जाना। इस श्रेणी से संबंधित सभी रोगियों को अस्पताल में भर्ती करना चाहिए और रोगी को अकेले में रखा जाता है। रोगी को स्वाइन फ्लू की दवा टैमिफ्लू दी जाती है और जांच भी जरूरी है।
स्वाइन फ्लू से ऐसे करें बचाव
– खांसने और छींकने के दौरान अपनी नाक व मुंह को कपड़े या रुमाल से जरूर ढकें
– अपने हाथों को साबुन व पानी से नियमित रूप से धोएं
– भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में जाने से बचें
– फ्लू से संक्रमित हों तो घर पर ही आराम करें
– फ्लू से संक्रमित व्यक्ति से एक हाथ तक की दूरी बनाए रखें
-पर्याप्त नींद और आराम लें, पर्याप्त मात्रा में पानी-तरल पदार्थ पिएं और पोषक आहार खाएं
– फ्लू से संक्रमण का संदेह हो तो डॉक्टर को दिखाएं
क्या न करें
– गंदे हाथों से आंख, नाक या मुंह को छूना, सार्वजनिक स्थानों पर थूकना
– किसी को मिलने के दौरान गले लगना, चूमना या हाथ मिलाना
– बिना डॉक्टर को दिखाए दवाएं लेना
– इस्तेमाल किए हुए नैपकिन, टिशू पेपर इत्यादि खुले में फेंकना
– फ्लू वायरस से दूषित रेलिंग, दरवाजे आदि को न छूएं
– सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करना
-एजेंसियां

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