सेना में ट्रांसजेंडर्स पर ट्रंप के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट से समर्थन

अमरीकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को ट्रांसजेंडर्स को सेना में जाने से रोकने की नीति लागू करने के लिए हरी झंडी दे दी है.
अमरीका के शीर्ष कोर्ट ने ट्रंप ने प्रशासन के इस फ़ैसले को 5-4 से मंज़ूर किया. हालांकि निचली अदालतों में इस नीति को चुनौती देने के मामले चलते रहेंगे.
सुप्रीम कोर्ट के चार न्यायाधीशों ने ट्रंप प्रशासन के इस फ़ैसले का विरोध किया.
इस नीति के तहत ट्रांसजेंडर लोगों को सेना में आने से रोका जाएगा.
प्रशासन का कहना है कि ट्रांसजेंडर लोगों को नियुक्त करने से सेना के प्रभाव और क्षमता पर बड़ा जोखिम पैदा हो सकता है.
ट्रंप से पहले राष्ट्रपति रहे बराक ओबामा के समय ट्रांसजेंडरों को सेना में भर्ती करने की नीति को लागू किया था. इस नीति के तहत न केवल ट्रांसजेंडर सेना में भर्ती हो सकते थे, बल्कि उन्हें लिंग सर्जरी के लिए भी सरकारी मदद मिलने का प्रावधान किया गया था.
इस नीति के तहत सेना को 1 जुलाई, 2017 को ट्रांसजेंडर लोगों की भर्ती शुरू करनी थी, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इस सीमा को 1 जनवरी, 2018 तक बढ़ा दिया और उसके बाद नीति को पूरी तरह समाप्त करने का फैसला ले लिया.
हालांकि, सेना में ट्रांसजेंडर लोगों की भर्ती पर रोक को अदालत में कई बार चुनौती दी गई, जिसके बाद एक परिवर्तित नीति लाई गयी जिसमें भी ट्रांसजेंडर लोगों की सेवाओं पर व्यापक पाबंदियां रखी गईं. बाद में इसे भी निलंबित कर दिया गया.
पूर्व रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने इस नीति को उन ट्रांसजेंडरों तक सीमित कर दिया था, जिनका जन्मजात लिंग उनकी पहचान से मेल नहीं खाता. अमरीकी रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार फिलहाल करीब 8,980 ट्रांसजेंडर सक्रिय रूप से सेना में हैं.
बीबीसी के उत्तरी अमरीका संवाददाता एंथनी ज़र्चर का कहना है कि इस मुद्दे पर लड़ाई आगे भी जारी रहेगी. “ये सिर्फ़ सुप्रीम कोर्ट की एक कार्रवाई है और इसे कोर्ट की राय नहीं कहा जा सकता. लेकिन इतना ज़रूर है कि इस फ़ैसले के बाद रूढ़िवादी ताक़तें राष्ट्रपति ट्रंप के प्रति सहानुभूति रखने लगेंगी और इस मुद्दे पर और ज़ोर से आवाज़ उठाएंगी.”
राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी का दावा कर चुकी डेमोक्रेट सांसद कमला हैरिस ने ट्वीट किया, “सेना में ट्रांसजेंडर लोगों में हमारे देश की सेवा करने का साहस है और वो ऐसा करने के योग्य हैं. हमें इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़नी होगी.”
-BBC

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