भ्रामक खबरें फैलाने पर सुप्रीम कोर्ट सख़्त, सरकार व ट्विटर को जांच का आदेश

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, ट्विटर और अन्य इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म को फर्जी समाचार के माध्यम से नफरत फैलाने वाली ट्विटर सामग्री और विज्ञापनों की जांच करने के लिए कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और ट्विटर समेत अन्य इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म को फर्जी समाचार और फर्जी अकाउंट के माध्यम से भड़काने वाले संदेशों की जांच के लिए नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और ट्विटर को यह नोटिस जारी किया है।

इंटरनेट मीडिया की मनमानी पर रोक लगाएगी सरकार

इंटरनेट मीडिया की मनमानी पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार, आईटी नियमों में बदलाव करने जा रही है। केंद्र सरकार ने आईटी नियमों में बदलाव की जानकारी संसद को दी है। सरकार का मानना है कि आईटी नियमों में संशोधन से इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म भारतीय कानून के प्रति ज्यादा जवाबदेह होंगे। नए नियमों के आने से डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म को भारतीय आचार संहिता का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध होना पड़ेगा।

इंटरनेट मीडिया को कानून के दायरे में लाने की कोशिश 

इससे एक हफ्ते पहले ही सुप्रीम कोर्ट में फेक न्यूज पर अंकुश लगाने के लिए इंटरनेट मीडिया को नियंत्रित कर कानून के दायरे में लाने के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने ट्विटर और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया मंचों को विनियमित करने का कानून बनाने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। जिसके बाद सरकार की ओर से संसद में ये एलान किया गया है।

केंद्र सरकार की ओर से आइटी नियमों में बदलाव का ऐलान ऐसे समय में किया गया है, जब ट्विटर और केंद्र के बीच विवाद चल रहा है। दरअसल, केंद्र सरकार ने ट्विटर पर हैशटैग फार्मर्स जेनोसाइड से जुड़े सभी URLs को ब्लॉक करने का आदेश दिया था, लेकिन ट्विटर इन URLs को ब्लॉक करने से मना कर आनाकानी कर रहा है।

– एजेंसी

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