कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट सख्‍त, सरकार को फटकार लगाते हुए पूछे सीधे सवाल

नई दिल्‍ली। सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों पर आज सख्त रुख अपनाते हुए सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने तो सरकार से सीधे पूछ लिया कि क्या वह कानून को स्थगित करती है या फिर वह इस पर रोक लगा दे?
शीर्ष अदालत ने कहा कि किसानों की चिंताओं को कमेटी के सामने रखे जाने की जरूरत है। कोर्ट ने किसान आंदोलन पर सरकार के विवाद निपटाने के तरीके पर पर नाराजगी जताई। सुनवाई में के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कई तीखे सवाल भी पूछे।
कृषि कानून पर SC ने स्टे के संकेत दिए
सुप्रीम कोर्ट ने कानून के अमल पर स्टे के संकेत दिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि हम स्टे करेंगे जब तक कि कमेटी के सामने बातचीत चल रही है। हम स्टे करने जा रहे हैं। चीफ जस्टिस एस ए बोबडे ने कहा कि ‘हम आज की सुनवाई बंद कर रहे हैं।’ किसान मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पूरी। आदेश पारित होगा। कब होगा ये नहीं बताया गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम प्रस्ताव करते हैं कि किसानों के मुद्दों के समाधान के लिए कमेटी बने। हम ये भी प्रस्ताव करते हैं कि कानून के अमल पर रोक लगे। इस पर जिसे दलील पेश करना है कर सकता है
सुप्रीम कोर्ट ने सरकर को लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा कि हम नहीं समझते कि आपने सही तरह से मामले को हैंडल किया। कोर्ट ने कहा कि हम अभी कानून के मेरिट पर नहीं जा रहे हैं लेकिन हमारी चिंता मौजूदा ग्राउंड स्थिति को लेकर है जो किसानों के प्रदर्शन के कारण हुआ है।
’26 जनवरी को नहीं करेंगे मार्च ‘
किसान संगठनों के वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि हम 26 जनवरी को ट्रैक्टर मार्च नहीं करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इतना महत्वपूर्ण कानून कैसे संसद में बिना बहस के ध्वनिमत से पास किया गया।
कोर्ट ने कहा, प्रदर्शन के खिलाफ नहीं
चीफ जस्टिस ने कहा कि हमें खुशी हुई कि दवे ने यह कहा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम प्रदर्शन के खिलाफ नहीं हैं लेकिन अगर कानून पर रोक लगा दी जाती है तो किसान क्या प्रदर्शन स्थल से अपने घर को लौट जाएंगे?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसान कानून वापस करना चाहते हैं जबकि सरकार मुद्दों पर बात करना चाहती है। हम अभी कमेटी बनाएंगे और कमेटी की बातचीत जारी रहने तक कानून के अमल पर हम स्टे करेंगे।
साल्वे को कहा, सब-कुछ एक आदेश से नहीं
वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि अगर अदालत कानून पर रोक लगाती है तो किसान अपना आंदोलन वापस ले लें। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि मिस्टर साल्वे, सब-कुछ एक आदेश के जरिए हासिल नहीं किया जा सकता है। किसान कमेटी के पास जाएंगे। अदालत यह आदेश पारित नहीं कर सकती है कि नागरिक प्रदर्शन नहीं कर सकते हैं। स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। किसान आत्महत्या कर रहे हैं और जाड़े में सफर कर रहे हैं। किसान कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्हें अपनी समस्याओं को कमेटी के सामने कहने दें। हम कमेटी की रिपोर्ट फाइल करने के बाद कानून पर कोई फैसला करेंगे।
कोर्ट ने सुनवाई शुरू होते ही बता दी थी अपनी मंशा
चीफ जस्टिस ने सुनवाई शुरू होते ही कहा कि हम अपने इंटेशन को सबको साफ-साफ बता दें। हम इस मसले का सर्वमान्य समाधान चाहते हैं। यही वजह है कि हमने आपको पिछली बार (केंद्र सरकार) कहा था कि क्यों नहीं इस कानून को कुछ दिन के लिए स्थगित कर देते हैं? आप या तो समाधा हैं या फिर समस्या हैं। आप बताइए कि कानून पर रोक लगाएंगे या नहीं, नहीं तो हम लगा देंगे।
चीफ जस्टिस एस ए बोबडे ने कहा कि जिस तरह से प्रक्रिया चल रही है, हम उससे निराश हैं। उन्होंने अटार्नी जनरल से कहा कि शीर्ष अदालत सरकार के किसान आंदोलन को हैंडल करने के तरीके से बेहद नाराज है। अदालत ने कहा, ‘हमें यह भी नहीं मालूम कि आपने कानून को पास करने से पहले किस तरह की प्रक्रिया का पालन किया।’
क्‍यों थी आज की सुनवाई अहम?
प्रधान न्‍यायाधीश एसए बोबडे की अगुवाई वाली बेंच इन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। चूंकि केंद्र और किसान संगठनों के बीच अगली बैठक 15 जनवरी को होनी है, ऐसे में SC की राय बेहद अहम हो जाती। 6 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। इसके अलावा बेंच में शामिल पीठ में जस्टिस एएस बोपन्ना और वी रामसुब्रमण्यम ने कहा था कि अगर सोमवार (11 जनवरी) को बताया जाता है कि चर्चा अभी भी जारी है, तो वह (कोर्ट) सुनवाई स्थगित कर देगा। इससे पहले 17 दिसंबर 2020 को शीर्ष अदालत ने विरोध जताने को मौलिक अधिकार बताते हुए किसानों को हिंसा या किसी भी नागरिक के जीवन या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के बिना विरोध जारी रखने की अनुमति दी थी।
आंदोलन का 47वां दिन, डिगने को तैयार नहीं किसान
नए कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों का आंदोलन सोमवार को 47वें दिन में प्रवेश कर गया। केंद्र सरकार के साथ कई दौर की बातचीत फेल होने के बाद, किसान संगठनों के नेता आंदोलन तेज करने की रणनीति बनाने में लगे हैं। अगले दौर की बातचीत 15 जनवरी को होनी है। किसान संगठनों ने एलान किया है कि 26 जनवरी से पहले उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वो गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में ट्रैक्‍टर परेड निकालेंगे।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत का कहना है कि अगर केंद्र संग बैठक में नतीजा नहीं निकल रहा तो किसान भी बैठे हुए हैं। उन्‍होंने आईएएनएस से बातचीत में रविवार को कहा, “सरकार ने इस आंदोलन को इतना बढ़ा दिया, अगर बातचीत करें तो क्या नहीं हो सकता। हम चाहते हैं कि फैसला हो लेकिन सरकार भी तो चाहे।”
संयुक्त किसान मोर्चा की प्रदर्शनकारियों से अपील
संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले विभिन्न किसान संगठनों के नेताओं की अगुवाई में आंदोलन जारी है। मोर्चा ने प्रदर्शनकारी किसानों से आत्महत्या जैसा कोई कदम नहीं उठाने की अपील की है। रविवार को एक बयान में कहा गया कि ‘आत्महत्या किसी समस्या का हल नहीं है, बल्कि यह अपने आप मे एक समस्या है, इसलिए प्रदर्शनकारी किसान स्वयं के जीवन को खत्म करने जैसा कोई फैसला न लें।’
कांग्रेस 15 को करेगी राजभवनों का घेराव
मुख्‍य विपक्षी दल कांग्रेस ने बीजेपी पर ‘जिद्दी और घमंडी रवैया’ अपनाने का आरोप लगाया है। पार्टी 15 जनवरी को सभी राज्यों में ‘किसान अधिकार दिवस’ मनाएगी और उसके नेता एवं कार्यकर्ता राजभवनों का घेराव करेंगे। कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि ‘समय आ गया है कि मोदी सरकार देश के अन्नदाता की चेतावनी को समझे, क्योंकि अब देश के किसान काले कानून खत्म करवाने के लिए करो या मरो की राह पर चल पड़े हैं।’
-एजेंसियां

50% LikesVS
50% Dislikes

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *