Zoom App के बैन वाली याच‍िका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

नई द‍िल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने Zoom App पर रोक लगाने की मांग पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। देश के मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे, जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस हृषिकेश राय की पीठ ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को कहा कि वो चार हफ्ते में इस पर जवाब दाखिल करे।

दिल्ली निवासी हर्ष चुघ की याचिका में Zoom App के प्रयोग पर सवाल उठाते हुए उस पर रोक लगाने की मांग की गई ज‍िस पर अब कोर्ट ने सरकार से जवाब तलब क‍िया है। बुधवार को दायर की गई वीडियो कॉलिंग एप जूम पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाली याचिका में निजता के अधिकार हनन का आरोप लगाया है।

याचिका मुख्य रूप से Zoom App की इंटरनेट सुरक्षा की कमी पर आधारित है। इसमें कहा गया है कि एप्लिकेशन सुरक्षित नहीं है और इसमें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन नहीं है और यह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और सूचना प्रौद्योगिकी (प्रक्रिया और सुरक्षा उपायों का अवरोधन, निगरानी) का उल्लंघन कर रहा है।

याचिका में निजता के अधिकार का हवाला देते हुए कोर्ट से आग्रह किया गया है कि वह केंद्र को इस एप पर तबतक प्रतिबंध लगाने का निर्देश दे जबतक कि कोई उचित कानून नहीं बन जाता।

दिल्ली निवासी हर्ष चुघ की याचिका में कहा गया है कि Zoom App के लगातार इस्तेमाल से साइबर अपराध का खतरा है। इसलिए इसके इस्तेमाल के संबंध में विस्तृत तकनीकी अध्ययन कराने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए, ताकि इससे पैदा होने वाले सुरक्षा और गोपनीयता के खतरों का पता चल सके। याचिका के अनुसार, ‘कोविड-19 महामारी से उपभोक्ता, कारोबारी और स्कूलों के संवाद में जबरदस्त बदलाव आया है। अब लोग हाथ बढ़ाने की बजाय जूम के माध्यम से संपर्क स्थापित कर रहे हैं। जूम लाखों उपभोक्ताओं की व्यक्तिगत सूचनाओं का दुरुपयोग करके निजता के अधिकार का हनन कर रहा है।’ याचिका में जूम पर उपभोक्ताओं का निजी डाटा और फाइलों का संग्रह करने का भी आरोप लगाया गया है।

यह दलील दी गई है कि

“जूम सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन का उपयोग करने वाले व्यक्तियों की निजता को खतरा है और यह साइबर सुरक्षा को भी प्रभावित करता है। यह भी कहा गया कि ज़ूम वीडियो कम्युनिकेशंस के सीईओ ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है और सुरक्षित रूप से सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के मामले में एप्लिकेशन को दोषपूर्ण माना है, जो साइबर सुरक्षा के मानदंडों के खिलाफ है। ” याचिकाकर्ता हर्ष चुघ ने होममेकर और रिमोट वर्कर (जूम के माध्यम से ट्यूशन क्लासेज लेने वाले) के तौर पर हैकिंग और साइबर ब्रीच के मामलों के बारे में चिंतित है, जो लगातार रिपोर्ट की जा रही है।

इसलिए, याचिका ने अन्य हितधारकों जैसे केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय और एमएचए के साइबर और सूचना सुरक्षा प्रभाग को भी ज़िम्मेदार बताया है। याचिका में कहा गया कि “जो राहतें मांगी गई हैं, वे प्रत्येक दिन के साथ बढ़ते सॉफ्टवेयर के दखल के मद्देनजर जरूरी हैं और वर्तमान याचिका में उठाई गई चिंताओं के कारण पूरे भारत में इसका असर होगा ”

इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने कहा है कि “ज़ूम ऐप डेटा होर्डिंग और साइबर होर्डिंग की प्रैक्टिस करता है”, “ज़ोम्बॉम्बिंग” जैसे अनधिकृत उपयोग के मुद्दे जहांमीटिंग में एक अजनबी ज़ूम मीटिंग में शामिल होता है और आपत्तिजनक चीजों / अश्लील चित्र डालकर अव्यवस्था का कारण बनता है।

“एंड टू एंड एन्क्रिप्शन” ज़ूम के झूठे विज्ञापन के मुद्दे और चल रही महामारी पर इसके निरंतर पूंजीकरण पर याचिकाकर्ता द्वारा जोर दिया गया है और यह सॉफ़्टवेयर या ऐप के आसपास की सुरक्षा चिंताओं के बारे में साइबर समन्वय समिति की सार्वजनिक सलाह पर भी प्रकाश डाला गया है।

– एजेंसी

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