कर्नाटक के पारंपरिक खेल ‘कंबाला’ पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इंकार

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को कर्नाटक के पारंपरिक भैंसा दौड़ खेल ‘कंबाला’ पर फिलहाल रोक लगाने से इंकार कर दिया और कहा कि वह इस मुद्दे पर मार्च में सुनवाई करेगा। कंबाला खेल राज्य में दिसंबर में शुरू होता है और मार्च तक चलता है।
पीपुल फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत से इस मामले में हस्तक्षेप करने और खेल को रोके जाने का आग्रह किया जो इस बार 18 फरवरी को होना प्रस्तावित है। इस पर प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने कहा, ‘‘दौड़ें अगले साल भी जारी रहेंगी।’’
कंबाला को रोकने के लिए लूथरा ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली न्यायाधीश ए. एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ की पीठ से कहा कि कंबाला को समर्थन देने वाले विधेयक की अवधि समाप्त हो चुकी है और अब इस खेल को जारी रखने का कोई वैधानिक आधार नहीं है।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद ने अदालत को सूचित किया कि कंबाला खेल को जारी रखने से संबंधित कर्नाटक सरकार का कानून राष्ट्रपति के पास स्वीकृति के लिए लंबित है। अदालत ने इसके बाद पेटा की याचिका पर 12 मार्च को इस मामले की अंतिम सुनवाई मुकर्रर की।
-एजेंसी