सुप्रीम कोर्ट ने खत्‍म की TajMahal के रात्रि दीदार की उम्‍मीद

Tajmahal रात्रि दर्शन पर एएसआई ने नहीं की सुप्रीम कोर्ट में अपने आवेदन-पत्र की उचित पैरवी

आगरा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने Tajmahal रात्रिदर्शन की शर्तों में बदलाव हेतु प्रार्थनापत्र तो सितम्बर-2015 सुप्रीम कोर्ट में लगा दिया किन्तु यह प्रार्थनापत्र सुप्रीम कोर्ट द्वारा दो दिन पहले 25 सितंबर को संक्षिप्त आदेश से निरस्त कर दिया गया है। इस सम्बन्ध में आगरा डवलपमेन्ट फाउण्डेशन (ADF) के सचिव के0सी0 जैन द्वारा क्षोभ व्यक्त किया गया है।

उनके द्वारा बताया गया कि ASI द्वारा दि0 1.9.2015 को ताज रात्रिदर्शन की शर्तों में परिवर्तन हेतु एक प्रार्थनापत्र (आई0ए0 सं0 539) लगाया गया था, जिसमें मुख्य रूप से यह चाहा गया था कि रात्रिदर्शन के लिए दिन के दिन टिकिट उपलब्ध हो , रात्रिदर्शन हेतु ई-टिकिटिंग की सुविधा उपलब्ध हो , रात्रिदर्शन के लिए 50 व्यक्तियों के समूह के स्थान पर 75 व्यक्तियों के समूह की अनुमति हो, जो स्मारक में 30 मिनट के स्थान पर 45 मिनट तक रुक सकें और रात्रिदर्शन हेतु पर्यटकों का प्रवेश पूर्वी गेट के स्थान पर पश्चिमी गेट से हो।

रात्रि दर्शन की शर्तों में बदलाव CISF को भी कोई आपत्ति नहीं थी और बदलाव का समर्थन पर्यटन संस्थाओं एवं उ0प्र0 सरकार द्वारा भी किया गया था।

वर्तमान रात्रि दर्शन की व्यवस्था से न केवल पर्यटकों को ही परेशानी है अपितु पूर्वी गेट के पास स्थित रिहायशी नगला पैमा आदि की आबादियों के निवासियों को भी बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। यदि पश्चिमी द्वार से रात्रिदर्शन की अनुमति हो हो जाती तो इन आबादियों के निवासी भी राहत की सांस ले पाते।

सचिव KC Jain द्वारा रात्रि दर्शन की शर्तों में बदलाव के सम्बन्ध में कहा गया कि ADF एवं पर्यटन उद्योग द्वारा इसकी मांग निरन्तर की जा रही थी और अब दि0 25.9.2018 को ए0एस0आई के प्रार्थना पत्र के निरस्त होने से निराशा व्याप्त है। उनके ASI की कमी है जिसमें तार्किक ढंग से इस प्रकरण को सुप्रीम कोर्ट की खण्डपीठ के समक्ष नहीं रखा।

ADF की ओर से यह मांग की गई है कि इस आई0ए0 सं0 539 को पुनर्जीवित कराया जाये और ताजमहल के रात्रि दर्शन की शर्तों में आवश्यक बदलाव कराने की ठोस पैरवी ASI द्वारा की जाये।

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