सुपरटेक के 40-40 मंजिला दो टावर ढहाने का आदेश दिया सुप्रीम कोर्ट ने

नई दिल्‍ली। रियल एस्‍टेट कंपनी सुपरटेक लिमिटेड को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने नोएडा स्थित एक हाउजिंग प्रोजेक्‍ट (एमरॉल्ड कोर्ट) में कंपनी के दो 40 मंजिला टावर ढहाने का आदेश दिया है। दोनों टावरों को अवैध करार देने के इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय के फैसले को बरकरार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कई तल्‍ख टिप्‍पणियां कीं। अदालत ने कहा क‍ि नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों और सुपरटेक की मिलीभगत से यह निर्माण हुआ।
अदालत ने 3 अगस्‍त को पिछली सुनवाई में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। तब भी कोर्ट से नोएडा अथॉरिटी को खूब फटकार पड़ी थी। अदालत ने कहा था कि अथॉरिटी को एक सरकारी नियामक संस्‍था की तरह व्‍यवहार करना चाहिए, ना कि किसी के हितों की रक्षा के लिए निजी संस्‍था के जैसे। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2014 में दोनों टावरों को अवैध करार देते हुए ढहाने और अथॉरिटी के अधिकारियों पर कार्रवाई का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर अपील के दौरान रोक लगा दी थी।
फ्लैट्स के रिफंड का क्‍या स्‍टेटस है?
सुपरटेक के दोनों टावरों में 950 से ज्‍यादा फ्लैट्स बनाए जाने थे। 32 फ्लोर का कंस्‍ट्रक्‍शन पूरा हो चुका था जब एमराल्‍ड कोर्ट हाउजिंग सोसायटी के बाशिंदों की याचिका पर टावर ढहाने का आदेश आया। 633 लोगों ने फ्लैट बुक कराए थे जिनमें से 248 रिफंड ले चुके हैं, 133 दूसरे प्रोजेक्‍ट्स में शिफ्ट हो गए, लेकिन 252 ने अब भी निवेश कर रखा है।
अथॉरिटी और सुपरटेक की सांठगांठ कैसे?
अदालत ने पिछली तारीख पर नोएडा अथॉरिटी की हरकतों को ‘सत्ता का आश्‍चर्यजनक व्‍यवहार’ करार दिया था। बेंच ने कहा, “जब फ्लैट खरीदने वालों ने आपसे दो टावरों, एपेक्‍स और सीयान के बिल्डिंग प्‍लान्‍स का खुलासा करने को कहा, तो आपने सुपरटेक से पूछा और कंपनी के आपत्ति जताने के बाद ऐसा करने से मना कर दिया। इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के बाद ही आपने उसकी जानकारी दी। ऐसा नहीं है कि आप सुपरटेक जैसे हैं, आप उनके साथ मिले हुए हैं।”
बायर्स के रिफंड का क्‍या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक को कहा कि वह बायर्स को दो महीने के भीतर उसके पैसे रिफंड करे और 12 फीसदी ब्याज का भी भुगतान करे। सुपरटेक से आरडब्ल्यूए को 2 करोड़ रुपये का भुगतान करने को भी कहा गया है। टावर के खिलाफ आरडब्ल्यूए ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी।
तीन महीनों में धवस्‍त होंगे टावर
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एमराल्‍ड कोर्ट टावर के लिए तमाम फायर सेफ्टी नॉर्म्स और यूपी अपार्टमेंट एक्ट का उल्‍लंघन हुआ था। कंस्ट्रक्शन के लिए सुपरटेक के साथ नोएडा अथॉरिटी ने अवैध साठगांठ की थी और टावर बनाया गया। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने ट्विन टावर को तीन महीने में ध्वस्त करने का आदेश दिया है।
क्‍या-क्‍या दलीलें दी गई थीं?
सुनवाई के दौरान नोएडा अथॉरिटी ने कहा था कि प्रोजेक्ट को नियम के तहत मंजूरी दी गई थी। साथ ही दलील दी थी कि प्रोजेक्ट में किसी भी ग्रीन एरिया और ओपन स्पेस समेत किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया गया है। वहीं फ्लैट बायर्स की ओर से दलील दी गई है कि बिल्डर ग्रीन एरिया को नहीं बदल सकता है।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुपरटेक लिमिटेड की अपील पर सुनवाई हुई। हाई कोर्ट ने 2014 के आदेश में नोएडा स्थित टि्वन टावर को तोड़ने का आदेश दिया था और अथॉरिटी के अधिकारियों पर कार्रवाई का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर अपील के दौरान रोक लगा दी थी।
-एजेंसियां

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