कर्नाटक पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश: कल ही कराया जाए फ्लोर टेस्ट

नई दिल्ली। कर्नाटक में बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता देने के बाद उपजे विवाद पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि कर्नाटक में शनिवार यानी कल ही फ्लोर टेस्ट कराया जाएगा। यानी अब तय हो गया कि कर्नाटक में बीजेपी को बहुमत साबित करने के लिए अब 14 और दिनों का समय नहीं मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट में इस दौरान दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं। एक समय रिजॉर्ट पॉलिटिक्स का भी जिक्र आया, जब बीजेपी के वकील रोहतगी ने कहा कि कांग्रेस-जेडीएस ने अपने विधायकों को कर्नाटक के बाहर बंद कर रखा है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने हल्के अंदाज में कहा कि जिन रिजॉर्ट में विधायक रखे गए हैं, उनके मालिकों की शिकायत आ रही है कि उन्हें भी रिजॉर्ट में घुसने नहीं दिया जा रहा है।
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की 3 सदस्यीय बेंच के सामने बीजेपी और कांग्रेस-जेडीएस के पक्ष में दलीलें रखी गईं। सबसे पहले बीजेपी की तरफ से सुप्रीम कोर्ट को वह लेटर उपलब्ध कराया गया जिसे येदियुरप्पा की तरफ से राज्यपाल को भेजा गया था।
आइए आपको बताते हैं कर्नाटक के मेगा पॉलिटिकल ड्रामा पर कोर्ट रूप की इनसाइड स्टोरी…
– कांग्रेस-जेडीएस की याचिका के खिलाफ ऐडवोकेट मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट में वह पत्र सौंपा, जिसमें येदियुरप्पा को बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया था। मुकुल रोहतगी ने बीजेपी की तरफ से दलील देते हुए कहा कि पार्टी के पास बहुमत साबित करने के लिए विधायकों की पर्याप्त संख्या है और हम फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार हैं।
– बीजेपी के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि कांग्रेस और जेडीएस विधायकों से समर्थन मिलेगा और इस मौके पर मैं इससे अधिक कुछ नहीं कहना चाहता हूं।
– सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्री-पोल अलायंस, पोस्ट-पोल अलायंस से अलग होता है और लोगों को प्री-पोल अलायंस की जानकारी होती है। पोस्ट-पोल, प्री पोल की तुलना में थोड़ा हल्का होता है। कोर्ट ने कहा कि आखिरकार चीजें फ्लोर टेस्ट से ही तय होनी चाहिए। आपको बता दें कि कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस ने पोस्ट-पोल अलायंस बना सरकार बनाने का दावा पेश किया है।
– सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि आखिरकार यह नंबर गेम और राज्यपाल को देखना है कि किस दल के बहुमत का समर्थन है। राज्यपाल को पहले खुद को संतुष्ट करना है।
– सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि येदियुरप्पा को सरका बनाने का बुलावा देने के राज्यपाल के फैसले की वैधानिकता में जाने से बेहतर यह है कि आगे और मौका दिए जाने की बजाय शनिवार को फ्लोर टेस्ट कराया जाए।
– कांग्रेस का पक्ष रख रहे ऐडवोकेट सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट से पूछा कि पहले कोर्ट यह तय करे कि बहुमत साबित करने का मौका सबसे पहले किसे मिलना चाहिए। कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन को या बीजेपी को।
– सिंघवी की दलील पर जस्टिस बोडे ने कहा कि जिसे भी मौका मिलेगा, आखिरकार सदन बहुमत की तरफ ही जाएगा। जस्टिस सीकरी ने कहा कि फ्लोर टेस्ट होने दीजिए और सदन को तय करने दीजिए। यही सबसे बेहतर रास्ता है।
– सिंघवी ने कहा कि चुनाव एक बात है जबकि सरकार बनाने के लिए किसे बुलाया गया, यह दूसरी बात है। हम सभी जानते हैं कि जब अल्पमत की पार्टी को सरकार बनाने का न्योता मिलता है तो क्या होता। यह लोकतंत्र की हत्या कर देगा।
– सिंघवी ने दलील जारी रखते हुए कहा कि राज्यपाल को कैसे लगता है कि बीजेपी बहुमत साबित कर सकती है जबकि कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के पास बहुमत है।
– सिंघवी ने रोहतगी की दलील पर कहा कि उन्होंने बहुमत का दावा किया है। क्या उनके पास इसके समर्थन में लेटर है या वह अपने मन से ही ऐसा कह रहे हैं?
– सिंघवी ने कोर्ट से पूछा कि बीजेपी के बहुमत के दावे पर किसी स्पष्ट सबूत की जरूरत है या नहीं? या यह इस चीज की स्वीकारोक्ति है कि मुझे एक मौका दो और मैं बहुमत बनाकर दिखा दूंगा?
– सिंघवी ने बेंच से कहा कि कांग्रेस-जेडीएस बिना किसी देर के कल फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार है।
– सिंघवी ने कोर्ट से दरख्वास्त की कि फ्लोर टेस्ट के दौरान वीडियोग्रफी होनी चाहिए। भय के बिना वोट देने के लिए विधायकों की सुरक्षा की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह शनिवार को फ्लोर टेस्ट की व्यवस्था के लिए डीजीपी को आदेश देगा।
– इसके बाद जेडीएस के कुमारस्वामी की तरफ से जिरह के लिए ऐडवोकेट कपिल सिब्बल खड़े हुए। सिब्बल ने कहा कि गवर्नर के पास सरकार बनाने के लिए पार्टी को आमंत्रित करने का कोई विवेकाधिकार नहीं है।
– सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये बहस के मुद्दे हैं, तो सिब्बल ने कहा कि ये मुद्दे सुलझाए जा चुके हैं।
– सुप्रीम कोर्ट ने सिब्बल से कहा कि हम समझते हैं कि आपके पास कहने के लिए बहुत कुछ है। हम यहां कानून को बनाए रखने के लिए हैं। हम यह कह रहे हैं कि एक बार फ्लोर टेस्ट पर सहमति बन जाएगी तो इन तर्कों की क्या जरूरत है।
– मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट के सामने समर्थन पत्र पर कांग्रेस और जेडीएस विधायकों के हस्ताक्षर पर सवाल उठाते हुए उन पर संदेह जताया।
– आखिरकार कपिल सिब्बल ने भी कहा कि जेडीएस भी तुरंत बहुमत परीक्षण चाहती है।
– सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि कर्नाटक में प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति होनी चाहिए।
– सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल से कहा कि बहुमत परीक्षण से पहले किसी भी ऐंग्लो-इंडियन समुदाय के शख्स को विधायक नॉमिनेट मत करिए।
– रोहतगी ने शनिवार को बहुमत परीक्षण का विरोध किया। उन्होंने कहा कि एक दिन की बजाय तर्कपूर्ण समय होना चाहिए। रोहतगी के ने कहा कि विधायकों को आने और वोट करने के लिए समय मिलना चाहिए।
– इस बीच राम जेठमलानी खड़े हुए और उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को कानून का शासन स्थापित करना चाहिए और राज्यपाल ने कानून का उल्लंघन किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस पर बाद में सुनवाई की जाएगी।
– रोहतगी ने अंतिम प्रयास करते हुए सुप्रीम कोर्ट से कहा कि बहुमत परीक्षण सोमवार को कराया जाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और जेडीएस विधायकों को राज्य के बाहर बंद कर रखा गया है। उन्हें भा आकर वोट करना है, इसलिए और वक्त मिलना चाहिए।
– इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मजाक करते हुए कहा कि जिन रिजॉर्ट में विधायकों को रखा गया है उनके मालिक शिकायत कर रहे हैं कि वे खुद अपने रिजॉर्ट में प्रवेश नहीं कर पा रहे।
– इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को शाम 4 बजे बहुमत परीक्षण का आदेश सुनाया।
कोर्ट ने प्रोटेम स्पीकर (अस्थाई स्पीकर) द्वारा विश्वास मत परीक्षण के आदेश दिए।
सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में यह भी कहा कि 24 घंटे के अंदर बहुमत परीक्षण ही इस वक्त सर्वोत्तम विकल्प नजर आ रहा है। कोर्ट ने कर्नाटक के डीजीपी को शक्ति परीक्षण के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कराए जाने का भी निर्देश दिया। कांग्रेस के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने फ्लोर टेस्ट की विडियोग्राफी करवाने की भी मांग की। पीठ ने इसका फैसला लेने का अधिकार राज्यपाल के विवेक पर छोड़ा।
-एजेंसी

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