Taj Mahal के संरक्षण हेतु सुप्रीम कोर्ट ने दो अफसरों को दी जिम्‍मेदारी

नई दिल्‍ली। Taj Mahal के संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दो अफसरों को जिम्‍मेदार बताया है और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में 28 अगस्‍त को अगली सुनवाई होगी। पर्यावरण मंत्रालय के ज्‍वाइंट सेक्रेटरी केंद्र सरकार की तरफ से और ताज ट्रेपेजियम जोन के अध्यक्ष यूपी सरकार की तरफ से Taj Mahal संरक्षण के लिए जवाबदेह अधिकारी होंगे।

Taj Mahal संरक्षण मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को हुई सुनवाई में दो अफसरों की जिम्‍मेदारी तय करने की सूचना दी गई है। जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की अध्यक्षता वाली पीठ में अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बताया कि पर्यावरण मंत्रालय के ज्‍वाइंट सेक्रेटरी केंद्र सरकार की तरफ से और ताज ट्रेपेजियम जोन के अध्यक्ष यानी आगरा मंडल के कमिश्नर यूपी सरकार की तरफ से ताज संरक्षण के लिए जवाबदेह अधिकारी होंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव को मंजूर करते हुए कहा कि अब आगे से ये दोनों अधिकारी ही हलफनामा दाखिल करेंगे। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता एमसी मेहता ने ताज ट्रेपेजियम जोन के पुनर्गठन की मांग उठाई और कहा कि भूरेलाल कमेटी के जैसी ही एक कमेटी का गठन होना चाहिए। जो ताज के देखभाल का काम देखे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को तीन सप्‍ताह में लिखित में सुझाव देने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 28 अगस्त को होगी।

केंद्र और राज्‍य सरकार को दिया था आदेश
दरअसल पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने ताजमहल संरक्षण को लेकर कड़ी नाराजगी जताते हुए केंद्र और यूपी सरकार को आदेश दिया था कि वो 30 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट को बताएं कि आखिरकार ताज के संरक्षण के लिए केन्द्र, राज्य सरकार, पुरातत्व विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित किस विभाग में कौन अधिकारी जिम्मेदार है? क्या हम इसे सुधारेंगे?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को ये भी आदेश दिया था कि वे इसके लिए अधिकारियों और प्राधिकरणों को नियुक्त करें, जो ताजमहल के रखरखाव का काम करें और ताज ट्रेपेजियम जोन को फिर से विकसित करें। जस्टिस लोकुर ने कहा था कि इस मामले में किसी एक अधिकारी के पास अधिकार होना चाहिए और उसी पर इसकी जवाबदेही होनी चाहिए।

डीएम को लगाई थी फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने आगरा के डीएम को पेशी के दौरान फटकार लगाते हुए कहा था कि Taj Mahal के आसपास प्रदूषण फैलाने वाली अवैध इंडस्ट्री चल रही हैं लेकिन डीएम कुछ नहीं कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि विजन डॉक्यूमेंट तैयार करने में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को नहीं शामिल किया गया है। ऐसे में क्या इसे सही माना जाए? कोर्ट के मुताबिक कोई भी संस्था ताजमहल के प्रदूषण नियंत्रण की जिम्मेदारी नहीं लेना चाहती है हालांकि किसी न किसी को जिम्मेदारी लेनी होगी, फिर चाहे इसकी जिम्मेदारी पर्यटन मंत्रालय, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या फिर कोई और ले।

यूपी सरकार ने शुरुआती ड्राफ्ट दाखिल किया था
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हमने अनुभव किया है कि सभी संस्थाएं ताजमहल प्रदूषण नियंत्रण मामले में अपने हाथ धो रही हैं। कोर्ट ने केंद्र और यूपी सरकार से उन अधिकारियों और प्राधिकरण का नाम बताने को कहा है जिन्हें ताजमहल के रखरखाव और ताज संरक्षित क्षेत्र के पुनर्विकास की जिम्मेदार सौंपी जा सके।

सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक कोई भी संस्था ताजमहल के प्रदूषण नियंत्रण की जिम्मेदारी नहीं लेना चाहती है। बता दें कि 24 जुलाई को उत्तर प्रदेश सरकार ने ताजमहल संरक्षण के लिए बन रहे विजन डॉक्यूमेंट का शुरुआती ड्राफ्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया था। ड्राफ्ट विजन डॉक्यूमेंट में कहा गया था कि ताजमहल के आसपास के पूरे इलाके को ‘नो प्लास्टिक जोन’ घोषित किया जाए, वहां बोतलबंद पानी पर प्रतिबंध लगाया जाए। विजन डॉक्यूमेंट में प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्री पर बैन लगाने की भी बात की गई है। साथ ही यूपी सरकार ने कहा था कि Taj Mahal के प्रदूषणकारी उद्योग हटेंगे और यमुना रिवरफ्रंट के साथ पदयात्रियों के लिए सड़क बनेगी। इससे यातायात घटेगा।

-एजेंसी

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