मध्यस्थता से ही बनेगा राम मंदिर: सुप्रीम कोर्ट ने तय किए तीन नाम, मीडिया रिपोर्टिंग पर बैन

नई दिल्‍ली। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण पर विवाद को लेकर पांच जजों की संविधान पीठ ने मध्यस्थता को लेकर बड़ा फैसला दिया जिसके अंतर्गत कोर्ट ने पैनल गठित कर 8 हफ्ते के भीतर फाइनल रिपोर्ट देने को कहा है। ऐसे में साफ है कि कोर्ट ने आपसी बातचीत के जरिए मामले का Ram mandir का सर्वमान्य समाधान निकालने को कहा है। इस बीच पूरी प्रक्रिया की मीडिया रिपोर्टिंग पर बैन लगा दिया गया है।

खास बिंदु
1. अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता का आदेश दिया,
2. सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस इब्राहिम खलीफुल्लाह, श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पंचू  को       मध्यस्थ बनाया,
3. 4 हफ्ते में मध्यस्थ समिति को अपना रिपोर्ट सौंपना होगा,
4. सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता की प्रक्रिया की रिपोर्टिंग पर बैन लगाया

Ram mandir पर सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि मध्यस्थता की प्रक्रिया कैमरे के सामने की जाएंगी। यह प्रक्रिया फैजाबाद में होंगी। जिसका नेतृत्व जस्टिस कलीफुल्ला करेंगे। पैनल को आठ हफ्तों के अंदर पूरी रिपोर्ट देनी होगी। साथ ही चार हफ्तों में यह प्रक्रिया शुरू करनी होगी। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा, ‘अदालत की निगरानी में मध्यस्थता कार्यवाही गोपनीय होगी।’

यूपी के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी Ram mandir पर मध्यस्थता को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मध्यस्थता से आज इस मामले को कोई हल नहीं सका है। उत्तर प्रदेश के मंत्री मोहसिन रजा ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। अगर यह मामला आपसी बातचीत से सुलझाया जा सकता है तो इससे अच्छी बात और कुछ नहीं हो सकती।

निर्मोही अखाड़े से जुड़े लोगों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले में मध्यस्थता का आदेश देने का स्वागत किया है। वहीं, महंत राजू दास का कहना है कि क्या अयोध्या में संत नहीं थे जो मध्यस्थता के लिए श्री श्री रविशंकर को भेजा जा रहा है। साफ पता चल रहा है कि मामले को फिर से लटकाने की कोशिश हो रही है।

खास बात यह है कि एक हफ्ते में यह काम शुरू हो जाएगा और 4 हफ्ते में पैनल को अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपनी होगी। हालांकि फाइनल रिपोर्ट के लिए कोर्ट ने 8 हफ्ते का समय रखा है। कोर्ट ने फैजाबाद में ही मध्यस्थता को लेकर बातचीत करने की बात कही है। जब तक बातचीत का सिलसिला चलेगा, पूरी बातचीत गोपनीय रखी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पैनल में शामिल लोग या संबंधित पक्ष कोई जानकारी नहीं देंगे। इसको लेकर मीडिया रिपोर्टिंग पर पाबंदी लगा दी गई है।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने साफ कहा है, ‘कोर्ट की निगरानी में होने वाली मध्यस्थता की प्रक्रिया गोपनीय रखी जाएगी।’ सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मध्यस्थता की कार्यवाही कैमरे के सामने होनी चाहिए।

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद को मध्यस्थता के लिए भेजा जाए या नहीं इस ममाले पर आज उच्चतम न्यायालय में सुनवाई हुई। न्यायालय की संवैधानिक पीठ ने बड़ा आदेश देते हुए इसे मध्यस्थता पैनल के पास भेज दिया है ताकि इस मामले का स्थायी समाधान निकल सके। अदालत ने ममाले की मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक लगा दी है।

मध्यस्थता पैनल के लिए अदालत ने सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति खलीफुल्लाह, श्रीराम पंचु और श्रीश्री रविशंकर को नियुक्त किया है। अदालत का कहना है कि मध्यस्थता की प्रक्रिया कैमरे के सामने की जाएंगी। यह प्रक्रिया फैजाबाद में होंगी। जिसका नेतृत्व जस्टिस खलीफुल्लाह करेंगे। पैनल को आठ हफ्तों के अंदर पूरी रिपोर्ट देनी होगी। साथ ही चार हफ्तों में यह प्रक्रिया शुरू करनी होगी। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा, ‘अदालत की निगरानी में मध्यस्थता कार्यवाही गोपनीय होगी।’

-एजेंसी

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