सुप्रीम कोर्ट ने NRC convener व रजिस्ट्रार जनरल के मीडिया से बात करने पर रोक लगाई

नई दिल्‍ली। आज सुप्रीम कोर्ट ने NRC मुद्दे पर असम में NRC convener प्रतीक हाजेला और registrar general (आरजीआई) के. शैलेश के मीडिया में किसी तरह काबयान देने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के मुद्दे पर फटकारते हुए मीडिया से बात करने पर रोक लगा दी है।

कोर्ट ने आरजीआई और NRC convener से कहा कि इस बात को नहीं भूलें कि आप अदालत के अधिकारी हैं। आपका काम आदेशों का पालन करना है। आप कैसे इस तरह से प्रेस में जा सकते हैं। आप कोर्ट के अवमानना के दोषी हैं। कोर्ट ने समाचार पत्रों की खबरों का जिक्र करते हुये मीडिया को बयान जारी करने के एनआरसी संयोजक और भारत के महापंजीयक के अधिकार पर सवाल उठाये।

गौरतलब है कि गत 4 अगस्‍त को NRC convener प्रतीक हजेला ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए बताया था कि असम में असल नागरिकों की सूची बनाने की प्र​क्रिया पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी है जिनका नाम इस मसौदे में नहीं है उन्हें अपनी नागरिकता साबित करने के लिए अतिरिक्त या नए दस्तावेज़ जमा करने का मौका दिया जाएगा।

इस पूरे मामले में सरकार की मंशा और धार्मिक भेदभाव को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा, ”जिन 40 लाख लोगों का नाम मसौदा सूची में नहीं है उनमें सभी तरह के और सभी धर्मों के लोग शामिल हैं। ये किसी ख़ास समूह या धर्म से जुड़ी हुई नहीं है।”

”ये प्रक्रिया किसी धर्म, समुदाय या वर्ग के बारे में नहीं बल्कि तारीख के बारे में है और वो तारीख है 24 मार्च 1971।”
उन्होंने कहा कि जो कोई भी यहां रहता है और यहां तक कि जो इस तारीख से पहले बांग्लादेश से भारत में आया है वो यहां की नागरिकता के लिए योग्य है। NRC में 40 लाख से ज़्यादा लोगों को सूची से बाहर किया गया है. लेकिन उन्हें इसका कारण बताया गया है और उनके पास अपना जवाब देने के लिए 9 सितंबर तक का समय है।
लेकिन, कुछ लोगों में ये डर भी है कि जिन अधिकारियों ने पहले उनकी नागरिकता खारिज की थी अब फिर से उन्हीं अधिकारियों को दस्तावेज़ देने होंगे।
इस बारे में प्रतीक हजेला कहते हैं कि इससे बचने की कोशिश की गई है। उन्होंने बताया, ”हम कई केंद्रों पर अधिकारियों को बदलने की पेशकश करेंगे और इसके लिए अनुमति मांगेंगे।”
उन्होंने बताया, ”सुप्रीम कोर्ट ने गृह मंत्रालय से प्रक्रिया शुरू करने के लिए मानक ऑपरेटिंग प्रक्रिया पेश करने के लिए कहा है। इसे लेकर कोर्ट से अनुमति मिल जाने के बाद ही हम इसे लागू कर देंगे।
पहले के मुकाबले आसान होगा काम
प्रतीक हजेला मानते हैं कि 40 लाख लोगों का सूची से बाहर होना बहुत बड़ी संख्या है लेकिन वह कहते हैं, ”ये अंतिम संख्या नहीं है और न ही लोगों को किसी श्रेणी में बांटा जा सकता है।”
”यह एक व्यापक प्रक्रिया है और हम जमा किए गए लाखों दस्तावेजों और सबूतों के जरिए हर एक व्यक्ति की जांच कर रहे हैं. हम किसी और एजेंसी के नतीजों को स्वीकार नहीं कर रहे. हम खुद संपूर्ण सत्यापन के जरिए हर किसी के 1971 से पहले के संबंध का पता लगा रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि अब 40 लाख लोगों के दस्तावेजों की जांच करना पहले के तीन करोड़ 30 लाख लोगों के मुकाबले ज़्यादा आसान होगा। ये प्रक्रिया पूरे ध्यान से होगी और ग़लती की आशंका बहुत कम होगी। यहां तक कि इस बार और ज़्यादा अधिकारी दावों व आपत्तियों की जांच करेंगे।
अंतिम तौर पर इस सूची से कितने लोग बाहर होंगे, इस सवाल पर प्रतीक हजेला ने कहा कि किसी भी तरह का अनुमान लगाना ग़लत होगा। अंतिम संख्या इस बात पर निर्भर करती है कि कितने लोग अपनी नागरिकता का प्रमाण दे पाते हैं।
जवाब देने की आख़िरी तारीख 28 सितंबर है लेकिन अंतिम सूची कब तक आएगी, ये अभी साफ़ नहीं है।
प्रतीक हजेला ने बताया कि जब तक सुप्रीम कोर्ट कोई समय सीमा तय नहीं करता है, तब तक हम सूची प्रकाशित नहीं कर सकते हैं।

-एजेंसियां

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