नीट में Grace marks देने के मद्रास हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

तमिल स्टूडेंट्स को 196 Grace marks देने के मद्रास हाईकोर्ट के फैसले
नई दिल्‍ली। NEET में मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट पर मद्रास हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। मद्रास हाईकोर्ट ने तमिल मीडियम से नीट परीक्षा देने वाले स्टूडेंट्स को 196 Grace marks देने का आदेश दिया था और सीबीएसई से उम्मीदवारों की रैंकिंग को संशोधित कर उसे फिर से प्रकाशित करने के लिए कहा था। सीबीएसई ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। अब सीबीएसई की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा।

जस्टिस एसए बोब्डे और जस्टिस एल नागेश्वर राव ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सीबीएसई की याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है। इस मामले में अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी।

सीबीएसई ने 6 मई को 11 भाषाओं में 136 केंद्रों पर नीट परीक्षा का आयोजन करवाया था। इसके नतीजे 4 जून को जारी किए गए थे।

शीर्ष कोर्ट अब इस मामले की सुनवाई दो सप्ताह बाद करेगा। कोर्ट ने दोनों पक्षों को इस स्थिति का हल लेकर आने के लिए कहा है। कोर्ट ने कहा कि हम इस तरह से मार्क्स नहीं बांट सकते।

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि इस फैसले के बाद तमिल छात्र अन्य छात्रों से काफी अच्छी स्थिति में पहुंच जाएंगे।

नीट पर मद्रास हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने नीट यूजी की काउंसिलिंग पर रोक लगा रखी है। इससे हजारों विद्यार्थियों के दाखिले की प्रक्रिया बीच में लटकी हुई है। अब सुप्रीम कोर्ट से आदेश के बाद ही दोबारा काउंसिलिंग शुरू होगी।

मद्रास हाईकोर्ट ने सीबीएसई से कहा था कि परीक्षा में कुल 49 प्रश्नों में तमिल अनुवाद की त्रुटियां थी, जिनके लिए प्रति प्रश्न Grace marks के रूप में चार अंक दिया जाना चाहिए। पीठ ने तमिल माध्यम से नीट देने वाले सभी 24,720 प्रतिभागियों को 196 Grace marks देने का आदेश दिया था। मदुरै पीठ के जस्टिस सीटी सेल्वम और जस्टिस एएम बशीर अहमद ने माकपा नेता टीके रंगराजन की जनहित याचिका पर यह आदेश दिया था।

-एजेंसी

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