सुप्रीम कोर्ट ने HC का फैसला पलटा , Sikh Genocide के 15 दोषी बरी

नई दिल्‍ली। 1984 में Sikh Genocide मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 15 दोषियों को बरी कर दिया है, Sikh Genocide मामले में हाईकोर्ट अपना फैसला पहले दे चुका था जिसमें 15 लोगों को दोषी ठहराया गया था, उसी फैसले को पलटते हुए अब सुप्रीम कोर्ट ने नया फैसला सुनाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने 1984 सिख विरोधी दंगा मामले में 15 दोषियों को बड़ी राहत देते हुए बरी कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी को बरी करते हुए कहा कि पुलिस खुद मानती है कि दंगों में इन लोगो को किसी ने नहीं देखा है और ना ही किसी ने इनकी पहचान की है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर बिना किसी सबूत के हाईकोर्ट ने इनको सजा कैसे दी।

गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने पूर्वी दिल्ली के त्रिलोकपुरी में आगजनी करने और सिख विरोधी दंगा भड़काने के आरोप में इन सभी लोगों को दोषी ठहराया था, लेकिन अब दोषियों के खिलाफ सबूत न होने होने के चलते सुप्रीम कोर्ट ने 15 आरोपियों को बरी कर दिया है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2018 नवम्बर में इन लोगों के दोषी होने और निचली अदालत से मिली सजा को सही ठहराया था। उच्चतम न्यायालय ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि इन 15 लोगों के खिलाफ न तो दंगों में शामिल होने के सीधे सबूत मिले हैं और न ही गवाहों ने उनकी पहचान की है। इसी कारण इन्हें बरी कर दिया गया।

गौरतलब है कि 28 नवंबर 2018 को दिल्ली हाईकोर्ट ने त्रिलोकपुरी में 1984 में हुए दंगों के संबंध में 88 दोषियों को निचली अदालत द्वारा दी गई सजा को बरकरार रखा था। निचली अदालत ने सभी दोषियों को 5 साल की सजा दी थी।

मालूम हो कि निचली अदालत ने 1996 में दोषियों को पांच-पांच साल की कैद की सजा सुनाई थी। इस मामले में 95 शव बरामद होने के बाद भी किसी दोषी पर हत्या की धारा में केस दर्ज नहीं हुआ था। इनके खिलाफ कर्फ्यू उल्लंघन कर हिंसा फैलाने का आरोप था।

हाइकोर्ट निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था

दिल्ली हाइकोर्ट ने 1984 सिख विरोधी दंगा मामले में लगभग 83 लोगों को दोषी ठहराए जाने और पांच साल जेल की सजा सुनाए जाने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था। निचली अदालत ने घरों को जलाने और दंगों के दौरान कर्फ्यू का उल्लंघन करने के लिए इन लोगों को दोषी ठहराया था। दोषियों ने इस फैसले के खिलाफ हाइकोर्ट में अपील की थी। हाइकोर्ट ने इन लोगों की अपीलों को खारिज कर दिया था और कोर्ट ने सभी दोषियों को चार हप्ते के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था, बाद में इनमें में 15 दोषियों ने दिल्ली हाइकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
-एजेंसी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »