Unitech को लेकर केंद्र सरकार का प्रस्‍ताव सुप्रीम कोर्ट ने स्‍वीकारा

नई दिल्‍ली। रियल एस्टेट कंपनी Unitech का प्रबंधकीय नियंत्रण केंद्र सरकार अपने हाथों में लेगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से हजारों होमबायर्स को राहत मिलेगी, जो सालों से अपने घर का इंतजार कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने समाधान की रूपरेखा तैयार करने के लिए Unitech लिमिटेड के नए बोर्ड को दो महीने का समय दिया और उसकी रिपोर्ट मांगी है।
जस्टिस डीवाई चन्द्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने नए बोर्ड को किसी भी तरह की कानूनी कार्यवाही से दो महीने की छूट दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि Unitech के नए बोर्ड द्वारा समाधान की रूपरेखा बनाने की तैयारी की निगरानी के लिए शीर्ष अदालत के एक रिटायर्ड जज की नियुक्त की जाएगी।
केंद्र ने शनिवार को शीर्ष अदालत से कहा था कि वह करीब 12,000 परेशान मकान खरीदारों को राहत प्रदान करने के लिए Unitech की अधर में लटकी परियोजनाओं को पूरा करने और Unitech लिमिटेड का प्रबंधन अपने हाथ में लेने के 2017 के प्रस्ताव पर फिर से विचार के लिए तैयार है।
कोर्ट में पेश छह पेज के नोट में केंद्र ने कहा था कि वह यूनिटेक के वर्तमान प्रबंधन को हटाने और सरकार के 10 व्यक्तियों को निदेशक नियुक्त करने के दिसंबर, 2017 के अपने प्रस्ताव पर फिर से गौर करने लिए तैयार है। साथ ही केंद्र ने कहा था कि वह कंपनी की लंबित परियोजनाओं को पूरा करने के लिए इसमें धन नहीं लगाएगा। केंद्र ने कहा था कि कोर्ट को 12 महीने की छूट देनी चाहिए।
दूसरी बार किसी कंपनी का टेकओवर
यह दूसरी दफा है जब केंद्र ने इस तरह किसी कंपनी का टेकओवर किया हो। इससे पहले 2009 में सत्यम का सरकार ने टेक ओवर किया था, बाद में महिंद्रा आईटी ने कंपनी को टेक ओवर किया था।
मकान बनाने में नहीं लगाया खरीदारों का पैसा
29,800 होमबायर्स ने मकान खरीदने के लिए लगभग 14,270 करोड़ रुपये Unitech के पास जमा कराए और कंपनी ने 74 हाउजिंग प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए छह वित्तीय संस्थानों से 1,805.86 करोड़ रुपये का कर्ज लिया। Unitech ग्रुप और उसकी सहायक कंपनियों के बही-खातों की जांच करने के बाद ऑडिटर्स ने बताया है कि होमबायर्स से लिए गए कुल 40% (5,063 करोड़ रुपये) रकम का इस्तेमाल मकान बनाने में नहीं किया गया जबकि 2,389 करोड़ रुपये कहां गए इसका पता लगाना अभी बाकी है।
-एजेंसियां

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