गर्मी का मौसम कोरोना वायरस पर प्रभावी तो है, लेकिन उतना नहीं

गर्मी का मौसम कोरोना वायरस पर प्रभावी तो है लेकिन उतना नहीं, जितना हम सभी मानकर चल रहे थे। यानी गर्म मौसम का कोरोना पर असर तो पढ़ रहा है लेकिन धीमी गति से और हमारी उम्मीदों से कम।
गर्म मौसम में कोरोना वायरस का संक्रमण थम जाएगा, इस उम्मीद में इस बार सर्दी के मौसम में ही गर्मियों को बड़ी बेसब्री से इंतजार हो रहा था। अब जबकि तेज गर्मी का एक महीना यानी मई बीत चुका है तो एक्सपर्ट्स ने कोरोना पर गर्म तापमान के प्रभाव की जांच की।
अक्टूबर 2019 से दिसंबर 2019 के बीच जब कोरोना वायरस ने धीरे-धीरे अपनी रफ्तार बढ़ाई तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह वायरस पूरी दुनिया को थामने का काम कर सकता है। लेकिन मार्च आते-आते ऐसा हो गया, जब दुनिया एक तरह से थम गई और वजह बना कोविड-19
गर्म पानी और गर्म मौसम
-यूनिसेफ ने ऐसे बहुत सारे घरलू नुस्खों की क्षमता पर असहमति जताई है, जिन्हें लेकर यह दावे किए जा रहे हैं कि ये कोरोना से बचने में सहायक हैं। लेकिन साथ ही एक सायंटिस्ट जो फ्लू पर गर्म पानी के असर को लेकर स्टडी कर चुके हैं, उनका कहना है कि गर्म पानी आपकी परेशानियों को कम करता है और शरीर को मजबूत बनाने में मदद करता है।
-कुछ ऐसा ही अनुमान हेल्थ एक्सपर्ट्स ने गर्म मौसम को लेकर भी लगाया है कि जैसे-जैसे तापमान बढ़ेगा, कोरोना वायरस का प्रभाव कम होगा क्योंकि जनवरी से मई के बीच हुए अलग-अलग अध्ययनों में यह बात साफ हो चुकी है कि ठंडा और नमी से भरा मौसम कोरोना वायरस को तेजी से फैलाने का माध्यम बनता है।
-साथ ही यह बात भी साफ हो चुकी है कि ठंडे, नमीवाले और अंधेरे स्थान में कोरोना वायरस लंबे समय तक जीवित रहता है जबकि धूप और गर्मी वाले स्थान पर इस वायरस की आयु कुछ ही घंटे रह जाती है। ऐसे में यह विश्वास अधिक गहरा हुआ कि गर्मी आने पर कोरोना की रफ्तार तेजी से थमेगी।
कोरोना पर ऐसा हो रहा है गर्मी का असर
-अब जबकि हम मई का महीना क्रॉस कर चुके हैं और तेज गर्मी का दूसरा महीना जून चल रहा है। इस बीच गर्म मौसम का कोरोना पर कैसा असर रहा, इसे लेकर भी जानकारियां जुटाई गईं।
यानी गर्म मौसम का कोरोना पर असर तो पढ़ रहा है लेकिन धीमी गति से और हमारी उम्मीदों से कम।
– कैंब्रिज के माउंट ऑबर्न हॉस्पिटल के नए अध्ययन में पाया गया है कि पिछला 52 डिग्री फ़ारेनहाइट तक गर्म मौसम कोरोनो वायरस को बिल्कुल प्रभावित नहीं कर पाया लेकिन इस वायरस के संक्रमण में काफी हद तक कमी आई है। मतलब, कोरोना वायरस अभी भी उतना ही घातक है लेकिन इसके फैलने की दर कुछ धीमी हो गई है।
-इसलिए अब यह बात कही जा सकती है कि कोरोना वायरस पर गर्म मौसम का असर कम और धीमी गति से होता है। माउंट ऑबर्न हॉस्पिटल द्वारा की गई स्टडी में कहा गया है कि सूर्य की अल्ट्रा वॉयलट किरणें इस इंफेक्श को नए लोगों तक बढ़ने से रोकने में सहायक हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि…
-कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए 50 डिग्री फॉरेनहाइट तक टैंप्रेचर की आवश्यकता होती है। क्योंकि पिछले महीने में यह नोटिस किया गया है कि जिन स्थानों पर तापमान 20 से 30 डिग्री था वहां पर कोरोना के नए केस अधिक देखने को मिले। जबकि जिन स्थानों पर टेंप्रेचर 50 और इससे अधिक था, वहां संक्रमण के ताजा मामले कम सामने आए।
-एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि तापमान के साथ ही संक्रमण के फैलने की दर हर स्थान पर अलग-अलग है। इसलिए कोई भी एक बात सभी स्थानों के लिए लागू नहीं हो सकती है। लेकिन इतना साफ है कि गर्म मौसम में कोरोना का प्रभाव नहीं बल्कि इसके संक्रमण की दर कम होती है।
WHO के अनुसार
-कोरोना वायरस से बचने और इसका सामना करने के लिए वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की तरफ से जो उपाय सुझाए गए हैं, उनमें अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना भी शामिल है। डब्लूएचओ का मानना है और अब ज्यादातर हेल्थ एक्सपर्ट्स इस बात को साबित र चुके हैं कि जिन लोगों की इम्युनिटी अच्छी होती है, उन पर कोरोना का जल्दी असर नहीं होता है।
-साथ ही यह बात भी महत्वपूर्ण है कि अगर अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता वाला व्यक्ति भी किसी तरह कोरोना की चपेट में आ जाता है तो वह अन्य मरीजों की तुलना में जल्दी ठीक होता है। ऐसे लोगों को कोरोना संक्रमण के चलते जान जाने का खतरा भी बाकी लोगों की तुलना में बेहद कम होता है।
-एजेंसियां

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