ऐसी बातें… जो गुस्‍से में भी कभी अपने बच्‍चों को नहीं बोलनी चाहिए

माता-पिता कई बार जाने-अनजाने में बच्‍चों को कुछ ऐसा कह देते हैं जो सीधा उनके दिल पर जाकर लगता है जिसकी वजह से मानसिक समस्‍याएं पैदा हो सकती हैं।
बचपन में पेरेंट्स अपने बच्‍चे को जो कुछ भी कहते हैं या सिखाते हैं, उसका असर बच्‍चे की पर्सनैलिटी, बर्ताव, भावनाओं और आत्‍मसम्‍मान पर पड़ता है। दुर्भाग्‍यवश कई माता-पिता गुस्‍से में कई ऐसे गलत चीजें बोल जाते हैं जो बच्‍चे के मन में घर कर जाती हैं। अगर आपका बच्‍चा भी छोटा है तो आपको भी समझना चाहिए कि आपको उसे क्‍या कहना है और क्‍या नहीं।
वहीं, यहां हम आपको कुछ ऐसी बातों के बारे में बताने जा रहे हैं जो गुस्‍से में भी आपको अपने बच्‍चे को नहीं बोलनी चाहिए, वरना इसका उस पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है।
लुक्‍स को लेकर कमेंट
पेरेंट्स को अपने बच्‍चे के लुक को लेकर कोई कमेंट नहीं करना चाहिए। इससे बच्‍चे को अपनी बॉडी इमेज को लेकर चिंता होने लगती है। इसकी वजह से उनमें ईटिंग डिस्‍ऑर्डर भी हो सकता है। बच्‍चा पतला हो या लंबा या फिर उसका रंग काला हो या गोरा, आपको उसे उसकी लुक के हिसाब से प्‍यार नहीं करना है। उन्‍हें बाहरी सुंदरता की बजाय अपनी अंदरूनी खूबसूरती और मजबूती से प्‍यार करना सिखाएं।
तुम पैदा ही नहीं होते
बहन-भाई कई बार मजाक में बोल देते हैं कि ‘तुझे मम्‍मी-पापा ने गोद लिया था’, लेकिन आपको अपने बच्‍चे से ऐसा कुछ नहीं कहना है। उससे ये सब वाक्‍य न कहें- ‘काश! तुम कभी पैदा ही नहीं हुए होते या तुमसे पहले तुम्‍हारा भाई या बहन हो जाता तो तुम्‍हें इस दुनिया में लाने की जरूरत ही नहीं पड़ती।’
इससे बच्‍चों को लगता है कि उनकी जिंदगी की कोई अहमियत नहीं है। इससे उनमें कम उम्र में ही डिप्रेशन हो सकता है। अपने बच्‍चे को हमेशा स्‍पेशल फील करवाएं।
तुम्‍हारी उम्र में मैं क्‍या कुछ कर लेता
कई माता-पिता अपने बच्‍चों को अपना उदाहरण देते हुए कहते हैं कि तुम्‍हारी उम्र में तो हमने खाना बनाना या घर की जिम्‍मेदारियां उठाना सीख लिया था और तुम तो अभी तक गैर-जिम्‍मेदार हो।
आपकी ऐसी बातों से बच्‍चा हताश हो सकता है। बच्‍चों को अपना अलग रास्‍ता और मंजिल बनाने दें। इससे उनका आत्‍मविश्‍वास भी बढ़ेगा और वो आगे चलकर एक मजबूत शख्‍स बन पाएंगे।
तुम्‍हारे नंबर कम क्‍यों आए
ये बात तो लाजिमी है और भारत में तो अमूमन हर घर में बच्‍चों को ये सुनने को मिलता ही है। लेकिन आपको बता दें कि दूसरे बच्‍चों की उपलब्धियों की तुलना अपने बच्‍चे से करना बिलकुल गलत है। हर बच्‍चे में अलग खूबी और हुनर होता है और आपको नकारात्‍मक रूप से उसे दूसरों से कंपेयर करना, उसके आत्‍मविश्‍वास को तोड़कर रख सकता है। उन्‍हें आगे बढ़ने के लिए मोटिवेट करें और गुस्‍सा करना या तुलना करना छोड़ दें।
गलत शब्‍दों का इस्‍तेमाल न करें
हम कई बार बच्‍चों को गुस्‍से में बेवकूफ, नाकारा या निकम्‍मा कह देते हैं। आपके मुंह से निकले ये शब्‍द बच्‍चे के मन को तोड़कर रख सकते हैं। अगर आप खुद ही ऐसा करेंगे तो बच्‍चे भी बड़े होकर ऐसे ही भाषा का प्रयोग करने लगेंगे। माता-पिता होने के नाते अपने बच्‍चों को दयालु, बहादुर और धैर्यवान बनना सिखाएं।
-एजेंसियां

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