Missile निर्भय का सफल परीक्षण, 1000 किलोमीटर तक करेगी मार

नई दिल्‍ली। भारत ने आज 1000 किलोमीटर तक मार करने वाली स्वदेशी सब सोनिक क्रूज Missile निर्भय का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण ओडिशा के तटीय इलाके में किया गया।
इससे पहले भी इस Missile के कई सफल परीक्षणों का आयोजन किया जा चुका है। जल्द ही इसे सेना में शामिल कर लिया जाएगा। इस Missile को भारत की रक्षा अनुसंधान और विकास संस्थान (डीआरडीओ) ने विकसित किया है।
यह Missile क्षमता में अमेरिका के प्रसिद्ध टॉमहॉक मिसाइल के बराबर है। Missile मिसाइल 300 किलोग्राम तक के परमाणु वारहेड को अपने साथ ले जा सकती है। इस मिसाइल की सटीकता बहुत ज्यादा है।
इसलिए बड़ी है यह उपलब्धि
चीन और पाकिस्तान से बढ़ते खतरे को देखकर भारत ने एक लंबी दूरी की सब सोनिक क्रूज मिसाइल बनाने की सोची लेकिन हमें मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) की वजह इस रेंज से ज्यादा की मिसाइल को विकसित करने के लिए कोई विदेशी सहयोगी नहीं मिलने वाला था। जिसके बाद डीआरडीओ ने इस मिसाइल को अकेले विकसित करने का फैसला किया।
क्या है मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम
मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) एक अंतर्राष्ट्रीय निर्यात नियंत्रण समझौता है जो ऐसी मिसाइल तकनीकी को एक दूसरे को देने से रोकता है जिसकी रेंज 300 किलोमीटर और उसके वारहेड ले जाने की क्षमता 500 किलोग्राम हो। इसे साल 1987 में जी-7 के सदस्य देशों द्वारा स्थापित किया गया था। भारत साल 2016 में इस क्लब का मेंबर बना। इसी वजह से भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का रेंज 300 किलोमीटर तक ही रखा गया।
यह कोई अंतर्राष्ट्रीय कानून नहीं है बल्कि सदस्य देशों के बीच एक अनौपचारिक राजनीतिक समझ है जो मिसाइलों और मिसाइल प्रौद्योगिकी के प्रसार को सीमित करना चाहते हैं। यह किसी भी सदस्य देश के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है।
कैसे काम करती है निर्भय मिसाइल
निर्भय दो चऱण वाली, छह मीटर लंबी और 0.52 मीटर चौड़ी मिसाइल है। यह मिसाइल 0.6 से लेकर 0.7 मैक की गति से उड़ सकती है। इसका प्रक्षेपण वजन अधिकतम 1500 किलोग्राम है जो 1000 किलोमीटर तक मार कर सकती है। इसमें एडवांस सिस्टम लेबोरेटरी द्वारा विकसित ठोस रॉकेट मोटर बूस्टर का प्रयोग किया गया है जिससे मिसाइल को ईंधन मिलता है।
दो चरणों में उड़ान भरती है यह मिसाइल
यह मिसाइल दो चरणों में उड़ान भरती है। पहली बार में यह पारंपरिक रॉकेट की तरह लबंवत आकाश में जाती है फिर दूसरे चरण में क्षैतिज उड़ान भरने के लिए 90 डिग्री का मोड़ लेती है। रडार से बचने के लिए यह मिसाइल धरती से मात्र कुछ मीटर की ऊंचाई से उड़कर दुश्मन के ठिकाने को नष्ट कर देती है।
-एजेंसियां

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