स्टडी: कैंसर सेल्स को जड़ से खत्म करेगी कार्बन डाइऑक्साइड

क्या आप सोच सकते हैं कि कार्बन डाइऑक्साइड का इस्तेमाल कैंसर सेल्स को जड़ से खत्म करने के लिए किया जा सकेगा? शायद नहीं।
लेकिन हाल ही में एक आयी एक स्टडी में शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि अब कार्बन डाइऑक्साइड के इस्तेमाल से ट्यूमर या कैंसर टिशूज को जड़ से खत्म करने में मदद मिलेगी।
शोधकर्ताओं ने एक ऐसे उपकरण को विकसित किया है जो कम आय वाले देशों में ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित महिलाओं के इलाज में सहायक हो सकता है। इसके लिए यह उपकरण उद्योग मानक आर्गन के बजाय कार्बन डाइऑक्साइड का इस्तेमाल करता है।
PLOS One में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार शोधकर्ता एक ऐसा टिशू फ्रीजिंग टूल बनाना चाहते थे जो कार्बन डाइऑक्साइड का इस्तेमाल करता हो। यह गैस ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में आसानी से उपलब्ध है और इसकी वजह है कार्बोनेटेड ड्रिंक्स की बढ़ती पॉप्युलैरिटी।
शोधकर्ताओं के अनुसार कैंसर केयर में आविष्कार का मतलब हमेशा ही यह नहीं होता कि आपको कैंसर से बचाव के लिए एक नया ही ट्रीटमेंट विकसित करना पड़े। बल्कि कभी-कभी इसका अर्थ होता है कि सिद्ध चिकित्साओं पर मौलिक रूप से नया प्रयोग करना, ताकि वे दुनिया की ज्यादातर आबादी को आसानी से उपलब्ध हो सकें।
इस स्टडी के लिए शोधकर्ताओं ने इस कैंसर फ्रीजिंग टूल यानी उपकरण का तीन अलग-अलग एक्सपेरिमेंट्स में परीक्षण किया ताकि यह देखा जा सके कि यह ह्यूमन ब्रेस्ट के समान स्थितियों में पर्याप्त ठंडा रह सकता है और ट्यूमर टिशूज को सफलतापूर्वक खत्म कर सकता है या नहीं। पहले एक्सपेरिमेंट में शोधकर्ताओं ने इस उपकरण का प्रयोग अल्ट्रासाउंड जैल पर किया, जबकि दूसरे एक्सपेरिमेंट के लिए 9 ऐसे चूहों को चुना गया जिनमें 10 ब्रेस्ट ट्यूमर थे। परीक्षण के दौरान सभी टिशूज की माइक्रोस्कोप से जांच की गयी और सामने आया कि उपकरण ने करीब 85 फीसदी ट्यूमर टिशूज को खत्म कर दिया।
तीसरे एक्सपेरिमेंट में शोधकर्ताओं ने उपकरण को एक सुअर के लीवर में टेस्ट किया, जिसका तापमान ह्यूमन ब्रेस्ट के तापमान के समान है। परीक्षण में देखा गया कि क्या यह उपकरण ट्यूमर टिशूज को खत्म करने के लिए आवश्यकतानुसार ठंडा रह सकता है। इस टेस्ट में उपकरण सफल रहा।
-एजेंसियां

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