ख्यातिनाम companies से समर ट्रेनिंग लेकर लौटे संस्कृति के छात्र

मथुरा। संस्कृति यूनिवर्सिटी के तकनीकी शिक्षा के छात्र-छात्राएं कई ख्यातिनाम companies से समर ट्रेनिंग लेकर लौट आए हैं। ये छात्र इंडियन रेलवे, बीएचईएल, टाटा मोटर्स, एस्‍कॉर्ट लिमिटेड, भिलाई स्टील प्लांट, उत्तर प्रदेश जल निगम, पी.डब्ल्यू.डी., आर.ई.एस., जिंदल ग्रुप, टी.सी.एस., विप्रो, एरिस्ट्रोकेट, बी.पी.सी.एल., मारुति उद्योग, हीरो ग्रुप आदि ख्यातिनाम companies से समर ट्रेनिंग लेकर लौटे हैं।

कम्पनियों से प्रशिक्षण लेकर लौटे छात्र-छात्राओं भाव्या कुमारी, ज्योति प्रकाश, मोनिका, तारणा कुमारी, जीशान, बादाम सिंह, सत्यजीत कुमार, विभव गुप्ता, कन्हैया सिंह, पवन कुमार, वेद प्रकाश, बुलबुल गोयल, नताशा गुप्ता, अनमोल, संजू, प्रिंस, आशीष कुमार साहू, केशव शर्मा आदि ने इस प्रशिक्षण को अपने करियर के लिए महत्वपूर्ण करार दिया।

ज्ञातव्य है कि संस्कृति यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने गर्मी की छुट्टियों में छात्र-छात्राओं के समय की महत्ता को ध्यान में रखते हुए उन्हें देश की ख्यातिनाम कम्पनियों में प्रशिक्षण दिलाने का निश्चय किया था। इस कड़ी में यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने टेक्निकल एज्यूकेशन के दूसरे और तीसरे साल के छात्र-छात्राओं को 45 से 60 दिनों की समर ट्रेनिंग के लिए इंडियन रेलवे, बीएचईएल, टाटा मोटर्स, एस्‍कॉर्ट लिमिटेड, भिलाई स्टील प्लांट, उत्तर प्रदेश जल निगम, पी.डब्ल्यू.डी., आर.ई.एस., जिंदल ग्रुप, टी.सी.एस., विप्रो, एरिस्ट्रोकेट, बी.पी.सी.एल., मारुति उद्योग, हीरो ग्रुप आदि ख्यातिनाम कम्पनियों में भेजा था।

संस्कृति यूनिवर्सिटी के हेड कार्पोरेट रिलेशन आर.के. शर्मा का कहना है सिविल इंजीनियरिंग के 63, मैकेनिकल इंजीनियरिंग के 84, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के 41, कम्प्यूटर साइंस के 28, फैशन डिजाइनिंग के 31, बी.बी.ए. के 22 तथा एम.बी.ए. के 27 छात्र-छात्राएं देश की सुप्रसिद्ध कम्पनियों से प्रशिक्षण हासिल कर लौट आए हैं। छात्र-छात्राओं का कहना है कि समर ट्रेनिंग के दौरान हम लोगों को स्वयं को पहचानने का जहां अवसर मिला वहीं बड़ी कम्पनियों की लेटेस्ट टेक्निक और उनकी कार्यप्रणाली को भी करीब से देखने का मौका मिला।

संस्कृति यूनिवर्सिटी के उप-कुलाधिपति राजेश गुप्ता ने छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि उन्होंने समर ट्रेनिंग में जो कुछ सीखा है, उस पर निरंतर अभ्यास करते रहें ताकि शिक्षा पूरी करने से पहले वे किसी न किसी बड़ी कम्पनी में अपना करियर बना सकें। श्री गुप्ता ने कहा कि यूनिवर्सिटी चालू सत्र में इन छात्र-छात्राओं को निरंतर औद्योगिक भ्रमण के लिए भेजेगी ताकि समर ट्रेनिंग के दौरान सीखी गई हर बात इनके मानस में बनी रहे।

संस्थान के कार्यकारी निदेशक पीसी छाबड़ा ने छात्र-छात्राओं से मुखातिब होते हुए कहा कि टेक्निकल एज्यूकेशन में सिर्फ किताबी ज्ञान ही पर्याप्त नहीं होता, इसके लिए छात्र-छात्राओं को बड़ी-बड़ी कम्पनियों की कार्यप्रणाली को देखना और समझना भी बहुत जरूरी है। कुलपति डा. राणा सिंह का कहना है कि संस्कृति यूनिवर्सिटी युवा पीढ़ी को तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में दक्ष करने के लिए न केवल लेटेस्ट टेक्निक को प्रमुखता दे रही है बल्कि उसके प्रयास हैं कि यहां अध्ययन करने वाला हर विद्यार्थी बड़ी-बड़ी कम्पनियों की जरूरतों और उसकी कार्यप्रणाली से भी समय-समय पर रू-ब-रू होता रहे।

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