Plant Gene संरक्षण से रूबरू हुए संस्कृति यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स

संस्कृति यूनिवर्सिटी कृषि संकाय के छात्रों ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद दिल्ली के शैक्षिक भ्रमण में कृषि वैज्ञानिकों से Plant Gene संरक्षण पर आधुनिक जानकारी हासिल की।

विद्यार्थी जीवन में पाठ्य पुस्तकों के साथ ही शैक्षिक भ्रमण का भी विशेष महत्व है। संस्कृति यूनिवर्सिटी इस दिशा में छात्र-छात्राओं को निरंतर शैक्षिक भ्रमण पर भेजती रहती है। इसी कड़ी में गत दिवस संस्कृति यूनिवर्सिटी के कृषि संकाय के छात्र-छात्राओं ने नेशनल ब्यूरो आफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेज (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) नई दिल्ली का भ्रमण किया।

प्रो. अवधेश किशोर, डॉ. सैयद कामरान अहमद, डॉ. अमित कुमार सिंह, डॉ. प्रफुल्ल कुमार, डॉ. कुलदीप और असिस्टेंट प्रोफेसर अरविन्द कुमार त्रिपाठी के मार्गदर्शन में गए छात्र-छात्राओं को नेशनल ब्यूरो आफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेज के कृषि वैज्ञानिक डॉ. डी.के. सिंह और प्रो. शशि भल्ला ने बताया कि वर्तमान में नई किस्मों के बीज, बीमारी मुक्त पौधे एवं उन्नत पशु विकसित किए जा रहे हैं, जो कि आनुवांशिक शोध का ही प्रतिफल है। डॉ. डी.के. सिंह ने कहा कि समय तेजी से बदल रहा है। आज कृषि क्षेत्र में भी करियर की असीमित सम्भावनाएं हैं। कृषि पैदावार को बढ़ाने के लिए जहां निरंतर शोध हो रहे हैं वहीं बड़े-बड़े औद्योगिक समूह कृषि क्षेत्र में निवेश को आगे आ रहे हैं। शैक्षिक भ्रमण में छात्र-छात्राओं ने वहां की प्रयोगशालाओं का भी अवलोकन किया।

कुलाधिपति सचिन गुप्ता ने शैक्षिक भ्रमण से लौटे छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि उन्होंने नेशनल ब्यूरो आफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेज (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) नई दिल्ली में जो कुछ भी सीखा है, उस पर निरंतर अभ्यास करते रहें। हमारा प्रयास है कि कृषि के क्षेत्र में संस्कृति यूनिवर्सिटी स्वयं एक शोध केन्द्र के रूप में जानी जाए। उप-कुलाधिपति राजेश गुप्ता का कहना है कि खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिए यह जरूरी है कि कृषि के साथ-साथ उससे जुड़े अन्य घटकों जैसे पशुपालन, उद्यानिकी, मछली पालन, डेयरी आदि गतिविधियों को आपस में जोड़ा जाए, इसके बगैर खेती को लाभ के व्यवसाय में परिवर्तित नहीं किया जा सकता।

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