संस्कृति में बीफॉर्मा, D pharma प्रवेश को लेकर उत्साह

मथुरा। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा फार्मेसी के क्षेत्र में दिए जा रहे रोजगार के अवसरों को देखते हुए इन दिनों संस्कृति विश्वविद्यालय में B. pharma और D. pharma में प्रवेश को लेकर छात्र-छात्राओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। दरअसल फार्मेसी एक ऐसा सेक्टर है, जिसमें जॉब की कोई कमी नहीं है। उत्तर प्रदेश ही नहीं आज भारत क्लीनिकल रिसर्च आउटसोर्सिंग के क्षेत्र में भी ग्लोबल हब बनकर उभर रहा है।

फार्मेसी क्षेत्र में जॉब की अपार सम्भावनाओं को देखते हुए नए सत्र से संस्कृति विश्वविद्यालय में चार साल का बीफॉर्मा तथा दो साल का D. pharma कोर्स संचालित होने जा रहे हैं। साइंस विषय से बारहवीं परीक्षा पास करने वाले छात्र-छात्राएं इन दिनों बीफॉर्मा और डीफॉर्मा में दाखिले को लेकर दिलचस्पी दिखा रहे हैं। फार्मेसी की दुनिया में आगे बढ़ने के लिए डीफॉर्मा और बीफॉर्मा कोर्स में दवा के क्षेत्र से जुड़ी उन सभी बातों की थ्योरेटिकल और प्रायोगिक जानकारी दी जाती है जिनका प्रयोग आमतौर पर इस उद्योग के लिए जरूरी होता है। इसके साथ ही फार्माकोलॉजी, इंडस्ट्रियल केमिस्ट्री, हॉस्पिटल एंड क्लीनिकल फार्मेसी, फॉर्मास्यूटिकल, हेल्थ एज्यूकेशन, बायोटेक्नोलॉजी आदि विषयों की भी जानकारी दी जाती है।

हमारा देश फार्मास्युटिकल्स के क्षेत्र में काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। यहां का ड्रग मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर युवाओं को स्वर्णिम करियर प्रदान कर रहा है। इस क्षेत्र में युवा मॉलिक्युलर बॉयोलॉजिस्ट, फार्मेकोलॉजिस्ट, टॉक्सिकोलॉजिस्ट या मेडिकल इंवेस्टिगेटर बनकर अपना भविष्य संवार रहे हैं। फार्मासिस्ट की जहां तक बात है, एक हॉस्पिटल फार्मासिस्ट पर दवाइयों और चिकित्सा संबंधी अन्य सहायक सामग्रियों के भंडारण, स्टॉकिंग और वितरण का जिम्मा होता है। इसी तरह इन दिनों देश की जनसंख्या और यहां उपलब्ध सस्ते प्रोफेशनल की वजह से क्लीनिकल का कारोबार तेजी से फलने-फूलने लगा है। आज देश में कई विदेशी कम्पनियां क्लीनिकल रिसर्च के लिए आ रही हैं।

विदेशों में फार्मासिस्ट को रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट कहा जाता है। जिस तरह डॉक्टरों को प्रैक्टिस के लिए लाइसेंस की जरूरत होती है, उसी तरह इन्हें भी फार्मेसी में प्रैक्टिस करने के लिए लाइसेंस चाहिए। उन्हें रजिस्ट्रेशन के लिए एक टेस्ट पास करना होता है। बीफॉर्मा करने के बाद छात्र-छात्राएं फार्मास्युटिकल कम्पनियों में बतौर कैमिस्ट, क्लीनिकल रिसर्च आउटसोर्सिंग में बतौर रिसर्च असिस्टेंट, सरकारी, प्राइवेट और मेडिकल कॉलेजों में फार्मासिस्ट के रूप में काम कर सकते हैं। संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सचिन गुप्ता का कहना है कि संस्कृति यूनिवर्सिटी बीफॉर्मा और D. pharma विषयों के माध्यम से प्रदेश और देश को कुशल फार्मासिस्ट देना चाहती है।

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