Sanskriti University में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर बल

मथुरा। इंसान के जीवन का हर दिन महत्वपूर्ण है, यह व्यर्थ न जाए इसकी हम सभी को कोशिश करनी चाहिए। Sanskriti University का संस्थान आपका है लिहाजा आदर्श शैक्षणिक वातावरण कैसे निर्मित हो, युवा पीढ़ी आधुनिक शिक्षा प्रणाली से कैसे रू-ब-रू हो, इस पर हमें स्वयं सोचना होगा। उच्च शिक्षा का वजूद आपके अच्छे क्रिया-कलापों पर निर्भर करता है, आप बेहतर करेंगे तो संस्थान अपने आप तरक्की करेगा उक्त उद्गार Sanskriti University के कुलाधिपति सचिन गुप्ता ने संस्कृति यूनिवर्सिटी में आयोजित नववर्ष अभिनंदन समारोह में प्राध्यापकों को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए।

कुलाधिपति श्री गुप्ता ने कहा कि शिक्षण संस्थानों में गुणवत्ता बाहर से नहीं आएगी, हमें स्वयं इसका विकास करना होगा। हम अच्छा कर सकते हैं, यह भरोसा आपमें होना चाहिए। मेरी इच्छा है कि संस्कृति यूनिवर्सिटी उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक नजीर स्थापित करे। आप सभी में क्षमता है, उस क्षमता का सही इस्तेमाल कर आप आदर्श शिक्षक तथा आदर्श शैक्षणिक संस्थान की परिकल्पना को मूर्तरूप दे सकते हैं। शिक्षा, खेल, सांस्कृतिक सहित अन्य गतिविधियां तभी परवान चढ़ सकती हैं, जब आप स्वयं इसका बेहतर वातावरण तैयार करेंगे, स्वयं इसके लिए आएंगे।

इस अवसर पर संस्थान के कार्यकारी निदेशक पी.सी. छाबड़ा ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में प्राध्यापकों का आह्वान किया कि वह शिक्षणेत्तर कार्य को पैशन के रूप में लें। स्वयं पढ़ें और लिखें इससे न केवल उनका नाम होगा बल्कि संस्कृति यूनिवर्सिटी में अध्ययनरत छात्र-छात्राएं भी लाभान्वित होंगे। श्री छाबड़ा ने कहा कि आपके अच्छे प्रयासों और सिद्धांतों का लाभ समाज और शिक्षाजगत को कैसे मिले, इस पर स्वयं को विचार करना होगा। आज शिक्षा के क्षेत्र में कड़ी प्रतिस्पर्धा है, लिहाजा आपको अपनी उत्कृष्टता स्वयं सिद्ध करनी होगी। अफसोस आज शिक्षकों को पता ही नहीं होता कि वे बेहतर कर सकते हैं, इससे उनका स्वयं का नुकसान होने के साथ ही विद्यार्थियों के सीखने की प्रक्रिया भी शिथिल हो जाती है। यह एक संवेदनशील मुद्दा है जिसे सावधानी से सम्हालने की जरूरत है। छात्र-छात्राओं के लिए शिक्षक भाग्य विधाता होता है, लिहाजा उसे हमेशा अन्वेषण करते रहना चाहिए।

कुलपति डा. राणा सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज के समय में शिक्षकों को स्वयं अपने कार्य-प्रदर्शन को पहचानना और अभिस्वीकृत करना महत्वपूर्ण होता है। हम अपने आप में सुधार लाकर ही नई पीढ़ी का मार्गदर्शन कर सकते हैं। आज शिक्षित एवं कौशलयुक्त मानव शक्ति के अभाव में हमारा देश निर्जीव सा पड़ा है, उसमें हम सभी मिलकर नए प्राण फूंकने का प्रयास कर सकते हैं। विभागाध्यक्ष इंजीनियरिंग डा. कल्याण कुमार ने कहा कि सफलता का कोई शार्टकट नहीं हो सकता। हमें अपने रोजमर्रा के कार्यों का मूल्यांकन करते हुए छात्र-छात्राओं की नियमित निगरानी करना आवश्यक है। इस अवसर पर डीन स्टूडेंट वेलफेयर डा. ओ.पी. जसूजा, डा. संजीव कुमार सिंह, विभागाध्यक्ष कृषि संकाय नरेन्द्र नाथ सक्सेना, डा. डी.के. शर्मा और डी.जी. विवेक गुप्ता ने भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षण-प्रशिक्षण पर अपने-अपने विचार व्यक्त किए तथा संस्कृति यूनिवर्सिटी परिवार को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम का संचालन डा. सलोनी श्रीवास्तव ने किया।

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