ईवीएम को Aadhar से जोड़ने पर रुकेगा फ़र्ज़ी मतदान

ईवीएम से Aadhar जोड़ने पर वही मतदाता मतदान कर सकेगा जिसके प्रिंट्स (फिंगर/थम्ब) आदि मशीन से मैच खाएंगे

लोकतांत्रिक प्रणाली में अब चुनाव की विश्वसनीयता पर भी संदेह हावी हो गया है। इसका सबसे बड़ा कारण फर्जी और बोगस मतदान है। हालांकि फर्जी और बोगस मतदान न होने देने के लिए चुनाव आयोग ने कई कड़े कदम उठाए हैं, फिर भी फर्जी और बोगस मतदान कराने वाले (व्यक्ति/पार्टी) भी कोई ना कोई रास्ता निकाल लेते हैं। सबसे बड़ी समस्या है पार्टियों की सहमति। चुनाव आयोग चाहता है कि चुनाव निष्पक्ष हों , लेकिन पार्टियां चुनाव आयोग के कई फैसले से असहमत होती हैं। पहले पेटी छाप मतदान में पेटियां की पेटियां बदल दी जाती थी। उसके बाद इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन की प्रणाली आई तो लगा कि अब मतदान साफ और निष्पक्ष होंगे, किसी प्रकार का फर्जीवाड़ा नहीं होगा, किन्तु इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठने लगे।

आयोग के अधिकारियों का मानना है कि Aadhar से लिंक करने पर वोटिंग सिस्टम में सुधार आएगा। फर्जी वोटिंग नहीं हो पाएगी

चुनाव निष्पक्ष और साफ-सुथरे तरीके से हो सकें इसके लिए ईवीएम यानी इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन को Aadhar से लिंक किया जाना चाहिए। ये मांग हालांकि कई बार उठ चुकी है और पार्टियों ने इसका भरपूर विरोध इसलिए किया है कि उन्हें फर्जी मतदान का अवसर नहीं मिल सकता। ईवीएम से Aadhar जोड़ने पर वही मतदाता मतदान कर सकेगा जिसके प्रिंट्स (फिंगर/थम्ब) आदि मशीन से मैच खाएंगे। गत दिनों एक याचिका दर्ज की गई थी। इस याचिका में यह मांग भी की है कि देश में चुनाव आधार कार्ड से करवाए जाएं। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाय चंद्रचुड़ ने सुनवाई के लिए याचिका स्वीकार की थी। याचिका में चुनाव आयोग को भी पक्षकार बनाया गया है। आयोग के अधिकारियों का मानना है कि Aadhar से लिंक करने पर वोटिंग सिस्टम में सुधार आएगा। फर्जी वोटिंग नहीं हो पाएगी।

ईवीएम से फर्जी मतदान उन स्थानों पर होता है जहां के अधिकारी और नेताओं की मिलीभगत होती है। अब मशीन रामलाल या श्यामलाल के अंगूठे को या फिंगर प्रिंट्स को तो पहचानने से रही। वोटर लिस्टेड आदमी हो या किसी दल पार्टी का आराम से दो चार मतदाताओं के वोट ईवीएम से बटन दबाकर डाल सकता है। अगर आधार से ईवीएम लिंक होती है तो पार्टियों को बोगस और फर्जी मतदान का अवसर नहीं मिल सकेगा, इसलिए ये इसका विरोध कर रहे हैं। पिछले दिनों संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने वोटर आईडी को आधार से लिंक करने का विरोध किया था। उनका कहना था कि इससे निजता में खलल होगा। पता नहीं किस प्रकार की निजता की बात की गई। राजनीतिक दलों द्वारा ईवीएम के विरोध के इतर चुनाव आयोग भविष्य की नई तकनीकों पर सोच रहा है। इसी कड़ी में ईवीएम में तकनीकी सुधार करके उसमें आधार प्रमाणीकरण की सुविधा भी डाली जा सकती है। इससे मतदाता की पहचान का झंझट खत्म हो जाएगा और आधार प्रमाणीकरण से ही वह वोट डाल सकेगा।

करीब 30 करोड़ मतदाताओं ने आधार को मतदाता सूची से लिंक भी करा लिया था। लेकिन इसके बाद एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। तब से यह कार्य लंबित है। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में बाकायदा अर्जी दी है कि आधार को मतदाता सूची से लिंक करने की अनुमति प्रदान की जाए।

यह भी माना जा रहा है कि आधार कार्ड से चुनाव कराने में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। जिसके पास आधार नहीं होगा, वो वोट नहीं कर पाएगा। आधार कार्ड नहीं होने पर आज भी कई गरीबों को सरकारी राशन नहीं मिल रहा है।आधार कार्ड बनवाने में अभी भी लोगों की रुचि कम होने से भी शायद परेशानी आ रही है। जबकि आधार कार्ड हर सरकारी या गैर सरकारी कार्य के लिए जरूरत बन गया है। ऐसे में लोगों को अपना आधार कार्ड जरूर बनवाना चाहिए।

यहां हम यह विचार सकते हैं कि जब हमारी हर जानकारी आधार कार्ड से जुड़ी है। इसका मतलब है कि आधार हमारी एक कंप्लीट पहचान बन गया है तो क्यों ना ऐसा हो जाए की ईवीएम मशीन को भी आधार कार्ड से जोड़ दिया जाए। यदि इवीएम मशीन को आधार कार्ड से जोड़ दिया जाए तो होगा क्या अगर ऐसा हुआ तो आज जो फर्जी वोटिंग होती है या गलत तरीके से वोट डलते है ये सब फिर शायद पूरी तरह से बंद हो जायेगा।

हर व्यक्ति को सिर्फ एक ही वोट डालने का मौका मिलेगा क्योंकि आधार कार्ड के सहारे व्यक्ति की पूरी जानकारी आपको इंटरनेट पर उपलब्ध रहेगी व्यक्ति जैसे अंगूठा लगाएगा उसका आधार कार्ड नंबर दिखाई देगा।
आधार कार्ड से उस व्यक्ति को पहचानने में कोई परेशानी नहीं होगी अगर कोई फर्जी वोट डालता है तो उसे आसानी से पहचान लिया जायेगा और व्यक्ति को दोबारा वोट नहीं डालने दिया जायेगा। लेकिन जिस तरह राजनीतिक दल महिलाओं के आरक्षण के लिए चुप्पी साध जाते हैं, विधायक या सांसद के वेतन-भत्ते में बढ़ोतरी के लिए सारे दल एक सुर में गाते हैं, ऐसी पुंगी ये दल यानी ईवीएम को आधार से जोड़ने की मांग चुनाव आयोग से नहीं कर सकते तो चुनाव आयोग को स्वविवेक या जनता की मांग पर यह कार्य करना चाहिए।
अनिल शर्मा

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