UP के सीएम की सौतेली मां कूंदीं कुनबे के कलह में: कहा, अब जो होगा खुलकर होगा

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UP के सीएम की सौतेली मां कूंदीं कुनबे के कलह में: कहा, अब जो होगा खुलकर होगा

लखनऊ। अब UP के सीएम अखिलेश यादव की सौतेली मां भी समाजवादी कुनबे के कलह में कूद पड़ी हैं। यूपी चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी में मचा घमासान चुनाव खत्म होते होते एक बार फिर सिर उठाता नजर आ रहा है। पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना यादव ने मंगलवार को पहली बार परिवार के झगड़े पर खुलकर अपनी बात कही। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में उनका बहुत अपमान हुआ है, अब वह पीछे नहीं हटेंगी और अब जो होगा खुलकर होगा। उन्होंने शिवपाल को पार्टी से दरकिनार किए जाने को गलत बताया, तो बेटे प्रतीक यादव के राजनीति में आने का इशारा भी दिया। हालांकि साधना ने यह भी कहा कि वह अखिलेश को फिर से मुख्यमंत्री के पद पर देखना चाहती हैं, लेकिन माना जा रहा है कि साधना के तीखे तेवर आने वाले वक्त में अखिलेश के लिए चुनौती बन सकते हैं।
समाजवादी पार्टी में वर्चस्व की लड़ाई में साधना यादव की भूमिका को लकर तमाम तरह की अटकलें लगती रही हैं। इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए उन्होंने कहा, ‘प्रफेसर साहब नेताजी को बहुत मानते थे, नेताजी भी उन्हें बहुत मानते थे। मैंने परिवार में झगड़ा नहीं कराया, नेताजी का अपमान नहीं होना चाहिए था…मेरा बहुत अपमान हुआ है, लेकिन अब जो होगा खुल कर होगा…अब मैं पीछे नहीं हटूंगी। मेरे बारे में बात करने की लोगों में हिम्मत नहीं होनी चाहिए थी। मैं ऐसे परिवार में पली बढ़ी जहां मेरे पिता कहा करते थे कि अपने काम का ज्यादा प्रचार नहीं करना चाहिए, पर अब वक्त बदल गया है।’
साधना ने आगे कहा, ‘दुष्ट लोगों ने मेरे बारे में गलत बोला, लोगों ने मेरे घर को बर्बाद किया, मैं दुष्ट लोगों को जवाब देना चाहती हूं, मैंने नेताजी को कह दिया है कि अब रुकूंगी नहीं, अब मुझे कोई रोक नहीं सकता। जो कुछ भी परिवार में हुआ वह देखकर मुझे बुरा लगता है। अपने ऊपर लगे आरोपों पर मैं किसी को दोष नहीं देती।’
जिस वक्त पार्टी और सरकार में तनातनी अपने चरम पर थी, उस समय यूपी के मुख्य सचिव रहे दीपक सिंघल को पद से हटाए जाने के मामले में साधना की भूमिका को लेकर काफी चर्चा हुई थी। इसके जवाब में साधना कहा, ‘एक मुख्य सचिव का ट्रांसफर हुआ और लोगों ने कहा कि इसके पीछे मैं थी। यह पूरी तरह गलत है, काश कि मैं इतनी ताकतवर होती।’
यादव परिवार को लेकर साधना ने कहा, ‘मैंने सबको समय दिया है। चाहे प्रफेसर (राम गोपाल यादव) हों या उनके बेटे धर्मेंद्र या टीपू और बहुएं। मैंने सबको परिवार की तरह समझा है। मैं हमेशा नेताजी को श्रेय देना चाहती थी। मुझे हमेशा से लगता था कि मैं जो कुछ भी कर पा रही हूं, वह उनकी वजह से ही है।’ उन्होंने अखिलेश के लिए सीधे तौर पर तो कुछ बुरा तो नहीं कहा, पर यह जरूर कहा कि उन्हें गुमराह किया गया। साधना ने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि अखिलेश को किसने गुमराह किया, वह नेताजी और मेरी बहुत इज्जत करते हैं। एक जनवरी से लेकर अब तक मैंने अखिलेश से जितनी बातें की हैं, उतनी पिछले 5 सालों में भी नहीं कीं। मैं चाहती हूं कि हमारी पार्टी फिर से जीते और अखिलेश मुख्यमंत्री बनें।’
साधना ने कहा कि जिस तरह शिवपाल को दरकिनार किया गया, वह ठीक नहीं था। उन्होंने कहा, ‘उन्हें अपमानित नहीं किया जाना चाहिए था, उनकी कोई गलती नहीं थी। उन्होंने नेताजी और पार्टी के लिए बहुत कुछ किया है।’ मुलायम का जिक्र करते हुए साधना नेकहा, ‘चाहे कुछ भी हो जाए, किसी को नेताजी का असम्मान नहीं करना चाहिए था। उन्होंने ही पार्टी की स्थापना की और उसे सींचा।’
राजनीति में आने के सवाल पर साधना ने बेटे प्रतीक यादव को लेकर अहम संकेत दिया। उन्होंने कहा, ‘हमें नेताजी ने नहीं आने दिया, पर हम बैकग्राउंड में रहकर काम करते रहे। अब मैं राजनीति में नहीं आना चाहती, पर मैं चाहती हूं कि मेरा बेटा प्रतीक राजनीति में आए। मैं प्रतीक को सांसद बनते देखना चाहती हूं।’
-एजेंसी

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