मिनिमम बैलेंस रूल पर State Bank of India की सफाई

मुंबई। State Bank of India अपने अकाउंट होल्डर्स के खाते में मिनिमम 5,000 रुपये का बैलेंस न होने पर फाइन लगाने के नियम पर पुनर्विचार कर रहा है। इस नियम को लेकर काफी आलोचना झेल रहे State Bank of India ने सफाई भी दी है।

हाल ही में छात्रों और गरीबों के अकाउंट में मिनिमम बैलेंस नहीं होने पर पेनल्टी के रूप में पैसे काटने को लेकर एसबीआई मीडिया के निशाने पर आ गया था।

State Bank of India के मैनेजिंग डायरेक्टर रजनीश कुमार ने कहा कि इस नियम पर एसबीआई प्रबंधन पुनर्विचार कर रहा है।

एसबीआई के 40 करोड़ सेविंग्स अकाउंट्स में से 13 करोड़ प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत खोले गए थे। ये अकाउंट्स बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट्स (बीएसडीए) हैं। बीएसडीए के तहत देश के वंचित वर्ग के लोगों के बैंकअकाउंट खोलना अनिवार्य है। बीएसडीए अकाउंट्स में सारी सुविधाएं आम खातों जैसी ही होती हैं, लेकिन इसमें चेकबुक की सुविधा नहीं होती है।

State Bank of India के मैनेजिंग डायरेक्टर ने इस मुद्दे पर आगे कहा, ‘हम स्कूलों को छात्रों के बैंक अकाउंट्स बीएसडीए के अंतर्गत खुलवाने को सलाह दे रहे हैं। हम वैसे नॉर्मल अकाउंट होल्डर्स जो अपने खाते में मिनिमम बैलेंस रखने में असमर्थ हैं उन्हें भी अपना अकाउंट बीडीएसए में ट्रासंफर करवाने की सलाह दे रहे हैं। बीडीएसए अकाउंट्स में मिनिमम बैलेंस रखना अनिवार्य नहीं है। इससे अकाउंट होल्डर्स पेनल्टी देने से बच जाएंगे।’

उन्होंने आगे बताया, ‘पिछली तिमाही में लगभग 6 करोड़ खातों में मिनिमम बैलेंस से कम राशि जमा थी। हमारे लिए यह पहचान कर पाना मुश्किल होता है कि इन अकाउंट्स में कौन से गरीब लोग हैं और कौन नहीं।’

State Bank of India के मैनेजिंग डायरेक्टर रजनीश कुमार ने फिलहाल मिनिमम बैलेंस के नियम को हटाने की अटकलों को खारिज कर दिया है।
-एजेंसी