Chhath पर्व: जानें… नहाय-खाए, खरना, सायंकालीन अर्घ्य, प्रात: कालीन अर्घ्य

इस बार Chhath महापर्व के चार दिवसीय अनुष्ठान में ग्रह-गोचरों का शुभ संयोगों बन रहा है

नई दिल्‍ली। लोकआस्था के महापर्व Chhath का चार दिवसीय अनुष्ठान नहाय-खाए से रविवार 11 नवंबर को शुरू होगा। सोमवार 12 को लोहंडा-खरना और मंगलवार 13 नवंबर की शाम भगवान भास्कर को पहला सायंकालीन अर्घ्य और बुधवार 14 नवंबर की सुबह प्रात:कालीन अर्घ्य प्रदान किया जाएगा। गंगा घाटों व पवित्र नदियों में लाखों की तादाद में व्रती अर्घ्य देंगे। इस व्रत में 36 घंटे तक व्रती निर्जला रहते हैं। बिहार और पूर्वी उत्तरप्रदेश में छठ पर्व पूरी आस्था व भक्ति के साथ मनायी जाती है।

चार दिन तक चलने वाले सूर्य उपासना का महापर्व छठ नहाय खाय के साथ शुरू होगा। इसके बाद खरना होगा। जिसे पूजा का दूसरा व कठिन चरण माना जाता है। इस दिन व्रती निर्जला उपवास रखेंगे और शाम को पूजा के बाद खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करेंगे। अथर्ववेद के अनुसार षष्ठी देवी भगवान भास्कर की मानस बहन हैं। प्रकृति के छठे अंश से षष्ठी माता उत्पन्न हुई हैं। उन्हें बच्चों की रक्षा करने वाले भगवान विष्णु द्वारा रची माया भी माना जाता है।

इसीलिए बच्चे के जन्म के छठे दिन छठी पूजी जाती है, ताकि बच्चे के ग्रह-गोचर शांत हो जाएं। एक अन्य मान्यता के अनुसार कार्तिकेय की शक्ति हैं षष्ठी देवी।

रविवार को नहाय-खाए पर सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। वहीं मंगलवार 13 नवंबर को सायंकालीन अर्घ्य पर अमृत योग व सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग है जबकि प्रात:कालीन अर्घ्य पर बुधवार की सुबह छत्र योग का संयोग बन रहा है। सूर्य को अर्घ्य से कई जन्मों के पाप नष्ट होते हैं ज्योतिषाचार्य डा.राजनाथ झा ने शास्त्रों के हवाले से बताया कि सूर्य को अर्घ्य देने से व्यक्ति के इस जन्म के साथ किसी भी जन्म में किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं।

क्‍या करना चाहिए

पीतल व ताम्बे के पात्रों से अर्घ्य प्रदान करना चाहिए।

चांदी,स्टील,शीशा व प्लास्टिक के पात्रों से भी अर्घ्य नहीं देना चाहिए।

पीतल के पात्र से दूध का अर्घ्य देना चाहिए।

ताम्बे के पात्र में दूध से अर्घ्य नहीं देना चाहिए।

छठ महापर्व खासकर शरीर ,मन और आत्मा की शुद्धि का पर्व है। वैदिक मान्यता है कि नहाए-खाए से सप्तमी के पारण तक उन भक्तों पर षष्ठी माता की कृपा बरसती है जो श्रद्धापूर्वक व्रत करते हैं।

कब है नहाय-खाए, खरना, सायंकालीन अर्घ्य, प्रात:कालीन अर्घ्य

नहाय-खाए : रविवार 11 नवंबर

खरना (लोहंडा): सोमवार 12 नवंबर

सायंकालीन अर्घ्य: मंगलवार 13नवंबर

प्रात:कालीन अर्घ्य: बुधवार 14 नवंबर

सूर्य योग में भगवान भास्कर को पहला अर्घ्य 13 नवंबर को

सिद्धि योग में नहाय खाय और अमृतयोग में सायंकालीन अर्घ्य

-एजेंसी

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