श्रीकृष्‍ण जन्मभूमि की लठामार Holi 17 मार्च को, भव्‍य आयोजन की सभी तैयारियां पूरी

मथुरा। श्रीकृष्‍ण जन्मभूमि पर लठामार Holi का आयोजन 17 मार्च के दिन फाल्गुन शुक्ल रंगभरी एकादशी को किया जायेगा। इस विश्‍व प्रसिद्ध लठामार Holi को भव्य बनाने के लिए सभी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।

इस संबंध में जानकारी देते हुए श्रीकृष्‍ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि श्रीकृष्‍ण जन्मभूमि की विश्‍व प्रसिद्ध रंगारंग लठामार होली इस वर्ष सभी शास्त्रीय परंपराओं एवं मर्यादाओं के अनुकूल धूमधाम से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्‍यक व्यवस्थाएं सुनिश्‍चित की जा रही हैं। श्रीकृष्‍ण जन्मभूमि प्रांगण में आयोजित होने वाली यह परंपरागत Holi आज विश्‍वभर के कृष्‍ण भक्तों एवं ब्रज की परंपराओं में रुचि लेने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है। प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में देश-विदेश के श्रद्धालु जन्मभूमि की लठामार होली में सम्मिलित होकर आनन्द प्राप्त कर रहे हैं।

लठामार होली समिति के अध्यक्ष किशोर भरतिया ने बताया कि प्रिया-प्रियतम ने इस पवित्र लीला का दर्शन स्वयं कराकर ब्रजवासियों को परमानन्द प्राप्त कराया था। विगत लगभग 40 वर्ष से जन्मभूमि संस्थान एवं समिति का यह प्रयास है कि उसी परमानन्द की प्राप्ति ब्रजवासियों के साथ-साथ देश-विदेश के असंख्य कृष्‍ण भक्त प्राप्त करें, साथ ही हमारा प्रयास रहता है कि ब्रज में होली के अवसर पर आयोजित होने वाली अधिकांश लीलाओं के दर्शन जन्मभूमि की रंगारंग लठामार होली में कर पाएं।

लठामार होली समिति के महामंत्री नन्दकिशोर अग्रवाल ने बताया कि इस वर्ष लठामार होली में ग्राम रावल के सिद्ध हुरियारे-हुरियारिनों के साथ-साथ श्रीकृष्‍ण जन्मभूमि के हुरियारे-हुरियारिनें भी अपनी सहभागिता करेंगे। इस वर्ष हुरियारे-हुरियारिनों की पोशाक भव्य होगी। इन पोशाकों के निर्माण का कार्य जोर-शोर से चल रहा है।

अनिलभाई ड्रेसवाले ने बताया कि इस वर्ष लठामार होली के आयोजन में मंच सज्जा अद्भुत होगी, साथ ही मंच का निर्माण करते समय इस विषय का विशेष ध्यान रखा जायेगा कि बिना किसी अवरोध के प्रांगण में उपस्थित श्रद्धालुजन भगवान की लीलाओं के दर्शन कर पायें। इस वर्ष टीवी चैनल एवं प्रेस फोटोग्राफर भी लीलाओं का कवरेज कर पायेंगे।
अनिलभाई ड्रेसवाले ने आगे बताया कि इस वर्ष गुलाल और पुष्‍प वर्षा की छटा अद्भुद होगी। गुलाल की वर्षा करते समय ऐसा प्रयास रहेगा कि जन्मभूमि के पवित्र परिसर से आकाश सतरंगी दिखाई दे।

संस्थान के संयुक्‍त मुख्य अधिषाशी राजीव श्रीवास्तव ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा को देखते हुऐ सामान घरों पर कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जायेगी।

इस अवसर पर जन्मभूमि के तीनों द्वार से प्रवेश एवं निकास रहेगा। अधिषाशी राजीव श्रीवास्तव ने श्रद्धालुओं से अनुरोध किया है कि कोई भी इलैक्ट्राॅनिक या अन्‍य प्रतिबंधित सामान साथ लेकर न आयें ताकि प्रवेश पाने में असुविधा न हो।

  • Legend News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »