आध्यात्मिक गुरू जग्गी वासुदेव ने कहा, राम मंदिर वहीं और जल्‍द बनना चाहिए

नई दिल्‍ली। आध्यात्मिक गुरू जग्गी वासुदेव ने कहा कि चुनाव से पूर्व राम मंदिर निर्माण का फैसला होना चाहिए। उन्होंने सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश को लेकर जारी विवाद पर कहा कि यह आस्था का प्रश्न है और इसमें लैंगिक भेदभाव जैसी कोई बात नहीं है। आध्यात्मिक गुरू ने आर्थिक आधार पर आरक्षण का भी समर्थन किया।
आध्यात्मिक गुरू सद्गुरू जग्गी वासुदेव ने राम मंदिर निर्माण पर कहा कि वहां मंदिर ही बनना चाहिए। उन्होंने इकनॉमिक टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा कि मुस्लिमों को जमीन का थोड़ा अतिरिक्त हिस्सा दे सकते हैं, लेकिन राम मंदिर का निर्माण होना ही चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह हिंदू आस्था और संवेदना से जुड़ा प्रश्न है। पढ़ें, इंटरव्यू के प्रमुख अंश…
राम मंदिर बनाने पर आपके क्या विचार हैं?
यह बहुत विचित्र है कि कोर्ट यह तय करेगा कि वहां राम का जन्म हुआ था या नहीं। एएसआई का भी कहना है कि वहां एक मंदिर ही था। अब कोर्ट का कहना है कि यह जमीन से जुड़ा मामला है। जो भी है, लेकिन जल्द से जल्द यह सेटल होना चाहिए। राम मंदिर कभी चुनाव का मुद्दा नहीं था, कोर्ट को इसे तय करना है और कोर्ट इसे जल्द से जल्द तय कर दे। वहां मंदिर बना दो और खत्म करो। वहां पूरी जमीन में से सिर्फ 2.7 एकड़ ही विवादित जमीन है। अगर इसका एक तिहाई हिस्सा मुस्लिमों का है तो आदर्श स्थिति है कि मुस्लिमों को 2.7 एकड़ जमीन में जितना हिस्सा बनता है उससे अधिक हिस्सा गैर-विवादित जमीन में से मिलना चाहिए। क्या हमारे यहां भूमि विवाद ऐसे ही नहीं सुलझाए जाते हैं? हिंदुओं के लिए इस जमीन के साथ भावनाएं जुड़ी हैं क्योंकि उनकी मान्यता है कि राम लला ने वहीं जन्म लिया था। मुस्लिमों के साथ इस तरह की कोई भावना नहीं जुड़ी हुई। कोर्ट को चुनाव से पहले ही इस पर फैसला देना चाहिए।
सबरीमाला मुद्दे पर आप क्या सोचते हैं?
सबरीमाला मुद्दा कोई लैंगिक भेदभाव का मामला नहीं है। हमारे यहां देवियों के कहीं अधिक मंदिर हैं। मंदिर कोई प्रार्थना की जगह नहीं होती है, यहां पर आप सिर्फ दर्शन के लिए आते हैं। सबरीमाला अकाल ब्रह्मचारी का स्थान है। यह उनका निजी स्थान है… उनका शयनकक्ष। आप वहां क्यों जाना चाहती हैं? कोर्ट को यह नहीं तय करना चाहिए कि एक मंदिर के अंदर क्या हो या क्या नहीं हो।
किसानों की कर्ज माफी योजना पर आपकी क्या सोच है?
उत्तर: इससे खजाने पर प्रतिकूल असर पड़ता है और किसानों की समस्याएं कर्ज माफी के जरिए खत्म नहीं होंगी। किसानों ये यह कहें कि आप ऋण लो और फिर उसे मत चुकाओ। अगर आप एक बार पैसे लेकर फिर उसे कभी नहीं चुकाने का चलन शुरू कर दोगे तो कोई कब तक आपको पैसे देते रहेगा?’
आर्थिक आधार पर आरक्षण देने के फैसले पर आप क्या कहेंगे?
अब वक्त आ गया है कि आर्थिक आधार पर कमजोर वर्ग को रिजर्वेशन मिले। इसको लेकर लोग सिर्फ यह कह सकते हैं कि सरकार ने यह फैसला चुनावों से ठीक पहले किया। हालांकि, इस देश में हमेशा ही कोई न कोई चुनाव तो चलते ही रहते हैं।
-एजेंसियां

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »