Ambani के वेतन से साढ़े तीन गुना मार्क जकरबर्ग पर खर्च करती है फेसबुक

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के सीएमडी मुकेश Ambani का एक साल का जितना वेतन है, उसका साढ़े तीन अधिक रकम फेसबुक अपने फाउंडर मार्क जकरबर्ग पर खर्च करती है जबकि मुकेश Ambani एशिया के सबसे अमीर शख्स हैं।
Ambani को मिलने वाले सालाना 15 करोड़ रुपये के वेतन की तुलना में जकरबर्ग की सुरक्षा पर फेसबुक 52 करोड़ रुपये (73.3 लाख डॉलर) खर्च करती है, जो अंबानी के वेतन का साढ़े तीन गुना है।
बता दें कि भारतीय कंपनियां खतरों के बावजूद विदेशी कंपनियों की तुलना में अपने सीईओ की सुरक्षा पर बहुत ज्यादा खर्च नहीं करतीं।
जकरबर्ग की सुरक्षा पर होने वाला खर्च दुनिया की पांच सबसे बड़ी टेक कंपनियों के सीईओ की सुरक्षा पर होने वाले कुल खर्च से अधिक है। इन पांच कंपनियों के सीईओ में ऐमजॉन के जेफ बेजॉस और ओरेकल के लैरी एलिसन भी शामिल हैं, जिनकी सुरक्षा पर 10 लाख डॉलर से अधिक का खर्च आता है।
वैश्विक कंपनियों से पिछड़ीं
वैश्विक कंपनियों की तुलना में भारतीय कंपनियां अपने CEO की सुरक्षा पर बहुत अधिक खर्च नहीं करतीं। अंबानी का मासिक सिक्योरिटी बिल 15-16 लाख रुपये के आसपास है। हालांकि उन्हें सुरक्षा किसी सरकारी संगठन द्वारा नहीं, बल्कि CRPF द्वारा प्रदान किया जाता है। भारतीय सीईओ सुरक्षित भी नहीं हैं। अडाणी इंटरप्राइजेज के गौतम अडाणी को फिरौती के लिए साल 1998 में अगवा किया गया था और साल 2008 के आतंकवादी हमले के दौरान मुंबई के ताज महल होटल में फंसने के बाद वह बेहद मुश्किल से मौत के मुंह से बाहर आ पाए थे।
यही नहीं, आलस्टोम इंडिया के रतिन बसु को भी किडनैप किया गया था। केवल सीईओ ही नहीं, उनके परिजनों को भी निशाना बनाया जाता है। साल 2006 में अडोब इंडिया के सीईओ नरेश गुप्ता के तीन साल के बेटे को भी किडनैप किया गया था।
सरकार भी चाहती है सलामती
सरकारी सुरक्षा पाने वाले अंबानी किसी कंपनी के पहले शख्स हैं। उन्हें जेड श्रेणी की सुरक्षा दी गई है, जिसके अंतर्गत उनकी सुरक्षा में दो शिफ्टों में 33 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं। इन्फोसिस निजी क्षेत्र की पहली कंपनी है, जिसे CISF के जरिये सरकारी सुरक्षा दी गई। निजी क्षेत्र की कंपनियों की सुरक्षा से सीआईएसएफ को लगभग 175 करोड़ रुपये की कमाई होती है।
-एजेंसियां

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