प्रसिद्ध गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी की पुण्‍यतिथि पर विशेष

मुंबई। हिंदी फिल्मों के प्रसिद्ध गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी का जन्म निजामाबाद में 1 अक्टूबर 1919 को हुआ। इनका निधन 24 मई 2000 को मुंबई में हुआ। इनका मूल नाम असरार उल हसन खान था। पेशे से मजरूह हकीम थे। बाद में उनके गीतों ने बॉलीवुड को गजब की रुमानियत दी। मजरूह ने पहली बार 1946 में रिलीज़ हुई ‘शाहजहां’ फ़िल्म के लिए गीत लिखे। इसके गाने इतने मक़बूल हुए कि मजरूह को कभी पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा। उन्होंने क़रीब पांच दशकों तक 350 फ़िल्मों में 2000 से ज़्यादा गाने लिखे। वैसे तो मजरूह के मशहूर गानों की फेहरिस्त काफ़ी लंबी है और उनका सबका ज़िक्र यहां मुमकिन भी नहीं है। हम यहां उनके 2 चुनिंदा गीत पाठकों के लिए पेश कर रहे हैं।
तेरे घर के सामने-1963
संगीत-सचिन देव बर्मन

दिल का भंवर करे पुकार
प्यार का राग सुनो, प्यार का राग सुनो रे

फूल तुम गुलाब का
क्या जवाब आपका
जो अदा वो बहार है
आज दिल की बेकली, आ गई ज़बान पर
बात ये है तुमसे प्यार है
दिल तुम्हीं को दिया रे
प्यार का राग सुनो रे…
दिल का भंवर…

चाहे तुम मिटाना, पर न तुम गिराना
आँसू की तरह निगाह से
प्यार कि उँचाई
इश्क़ कि गहराई
पूछ लो हमारी आह से
आसमाँ छू लिया रे
प्यार का राग सुनो रे
दिल का भंवर…

इस हसीन उतार पे हम न बैठे हार के
साया बन के साथ हम चले
आज मेरे संग तो गूँजे दिल की आरज़ू
तुझसे मेरी आँख जब मिले
जाने क्या कर दिया रे
प्यार का राग सुनो…

आप का ये आँचल, प्यार का ये बादल
फिर हमें ज़मीं पे ले चला
अब तो हाथ थाम लो, इक नज़र का जाम दो
इस नये सफ़र का वस्ता
तुम मेरे साक़िया रे
प्यार का राग सुनो रे…

सीआईडी-1956
संगीत-ओपी नैय्यर

लेके पहला पहला प्यार
भरके आँखों मैं खुमार
जादू नगरी से आया है कोई जादूगर
लेके पहला पहला प्यार …

उसकी दीवानी हाय कहूँ कैसे हो गई
जादूगर चला गया मैं तो यहाँ खो गई
नैना जैसे हुए चार
गया दिल का क़रार
जादू नगरी से आया है कोई जादूगर
लेके पहला पहला प्यार…

तुमने तो देखा होगा उसको सितारों
आओ ज़रा मेरे संग मिलके पुकारो
दोनो होके बेक़रार
ढूँढे तुझको मेरा प्यार
जादू नगरी से आया है कोई जादूगर
लेके पहला पहला प्यार …

जब से लगाया तेरे प्यार का काजल
काली काली बिरहा की रतियां हैं बेकल
आजा मन के श्रृंगार
करे बिन्दिया पुकार
जादू नगरी से आया है कोई जादूगर
लेके पहला पहला प्यार…

मुखड़े पे डाले हुए ज़ुल्फ़ों की बदली
चली बलखाती कहाँ रुक जा ओ पगली
नैनों वाली तेरे द्वार
लेके सपने हज़ार
जादू नगरी से आया है कोई जादूगर
लेके पहला पहला प्यार…

चाहे कोई चमके जी चाहे कोई बरसे
बचना है मुश्किल पिया जादूगर से
देगा ऐसा मंतर मार
आखिर होगी तेरी हार
जादू नगरी से आया है कोई जादूगर
लेके पहला पहला प्यार …

सुन सुन बातें तेरी गोरी मुस्काई रे
आई आई देखो देखो आई हँसी आई रे
खेले होठों पे बहार
निकला गुस्से से भी प्यार
जादू नगरी से आया है कोई जादूगर
लेके पहला पहला प्यार…
-एजेंसी

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