मशहूर पार्श्वगायक किशोर कुमार की पुण्‍यतिथि पर विशेष

4 अगस्त 1929 को खंडवा (मध्यप्रदेश) में पैदा हुए मशहूर पार्श्वगायक किशोर कुमार का निधन 13 अक्टूबर 1987 को मुंबई में हुआ था। किशोर कुमार का असली नाम आभास कुमार गांगुली था।
उन्होंने हिंदी के अलावा बंगाली, मराठी, असमी, गुजराती, कन्नड़, भोजपुरी, मलयालम, उड़िया और उर्दू सहित कई भारतीय भाषाओं में गाया।
सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक के लिए 8 फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीते और उस श्रेणी में सबसे ज्यादा फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीतने का रिकॉर्ड बनाया है। उसी साल उन्हें मध्यप्रदेश सरकार द्वारा लता मंगेशकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
किशोर कुमार ने चार बार शादी की। उनकी पहली पत्नी बंगाली गायक और अभिनेत्री रुमा गुहा ठाकुरता उर्फ ​​रुमा घोष थीं। उनकी शादी 1950 से 1958 तक चली। उनकी दूसरी पत्नी अभिनेत्री मधुबाला थीं। किशोर कुमार की तीसरी शादी योगिता बाली से हुई थी, जो 1976 से 4 अगस्त 1978 तक चली। किशोर की चौथी शादी लीना चन्दावरकर से हुई थी। उनके दो बेटे हैं। अमित कुमार रुमा से और सुमित कुमार लीना चन्दावरकर से।
शुरू में किशोर कुमार को एस डी बर्मन और अन्य संगीतकारों ने अधिक गंभीरता से नहीं लिया और उनसे हल्के स्तर के गीत गवाए गए लेकिन किशोर कुमार ने 1957 में बनी फ़िल्म “फंटूस” में दुखी मन मेरे गीत अपनी ऐसी धाक जमाई कि जाने माने संगीतकारों को किशोर कुमार की प्रतिभा का लोहा मानना पड़ा।
एक्टिंग, म्यूजिक डायरेक्शन से लेकर लिरिक्स राइटिंग तक हर काम में माहिर किशोर का मन सबसे ज्यादा मन सिंगिंग में ही लगता था। उनकी आवाज का जादू आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में बसा है। किशोर कुमार को उनके टैलेंट ही नहीं मनमौजी स्वभाव के लिए भी जाना जाता है।
एक बार वे किसी फिल्म की शूटिंग कर रहे थे लेकिन प्रोड्यूसर ने उन्हें आधी पेमेंट ही दी थी। प्रोड्यूसर ने किशोर से कहा था कि फिल्म कंप्लीट होने के बाद आधे पैसे मिलेंगे। इस बात से किशोर कुमार खफा हो गए और उन्होंने इसका जवाब मजाकिया अंदाज में दिया। अगले दिन वे सेट पर आधी मूंछ और आधे बाल मुंडवा कर पहुंच गए। जब उनसे इस पागलपन की वजह पूछी गई तो उन्होंने कहा कि आधे पैसे मिले हैं तो गेटअप भी आधा ही होगा। जब पूरे पैसे मिलेंगे तो गेटअप पूरा हो जाएगा।
एक बार उनकी फ़िल्म ‘ उपकार ‘ के लिए किशोर कुमार को गाना गाने के लिए आमंत्रित किया तो वह यह कहकर भाग खड़े हुए कि वे तो फ़िल्म के हीरो के लिए ही गाने गाते हैं, किसी खलनायक पर फ़िल्माया जाने वाला गाना नहीं गा सकते। लेकिन ‘ उपकार ‘ का यह गीत ‘ कसमे वादे प्यार वफ़ा …’ जब हिट हुआ तो किशोर कुमार मनोज कुमार के पास गए और कहने लगे इतने अच्छे गाने का मौका उन्होने छोड़ दिया। इसके साथ ही उन्होंने यह स्वीकार करने में भी देर नहीं की कि मन्ना डे ने जिस खूबसूरती से इस गाने को गाया है ऐसा तो मैं कई जन्मों तक नहीं गा सकूंगा। अच्छा ही हुआ कि मैने इस गाने को नहीं गाया नहीं तो लोग इतने अच्छे गीत में मन्ना डे की इस खूबसूरत आवाज से वंचित रह जाते।
-एजेंसियां

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