हीमोफीलिया डे पर विशेष: समय पर इलाज बहुत जरूरी है

Haemophilia Day
हीमोफीलिया डे पर विशेष: समय पर इलाज बहुत जरूरी है

नई दिल्‍ली। हीमोफीलिक इस बीमारी को गंभीरता से लेते ही नहीं हैं. वे लगातार खून बहते रहने को एक आम समस्या की तरह लेते हैं. वे समझते हैं कि खून बहना कोई बीमारी नहीं है. कई डाक्टर भी यही कहते हैं कि खून बहना कोई बीमारी नहीं है. लेकिन लगातार बिना रुके खून बहते रहना अन्य गंभीर बीमारियों की तरह ही एक बीमारी है, जिस का समय पर इलाज किया जाना जरूरी है.

दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के डा. डी के गुप्ता बताते हैं कि हीमोफीलिया एक आनुवंशिक बीमारी है, जो आमतौर पर पुरुषों में ही अधिक पाई जाती है. यह बीमारी रक्त में थक्का नहीं बनने देती. हीमोफीलिया के मरीजों में रक्त प्रोटीन की कमी होती है जिसे क्लौटिंग फैक्टर भी कहा जाता?है. यह प्रोटीन या फैक्टर रक्त का वह गुण है जो बहते खून पर थक्के जमा कर उस का बहना रोक देता है. रक्तस्राव अंगों या ऊतकों को हानि पहुंचाता?है और कई बार अधिक रक्तस्राव जानलेवा भी होता है. यह बीमारी वास्तव में है क्या और किस तरह इसे नियंत्रित किया जा सकता है, जानना जरूरी है.

लक्षण

हीमोफीलिया के प्रकार व गंभीरता पर निर्भर करता है कि रक्तस्राव कितना होता है. जिस बच्चे को हलका हीमोफीलिया है, हो सकता है उस के लक्षण तब तक प्रकट न हों जब तक कि उस की कोई ऐसी सर्जरी या दुर्घटना न हो जिस में बहुत खून बहे. रक्तस्राव बाहरी या भीतरी, कैसा भी हो सकता है.

अत्यधिक बाहरी रक्तस्राव के लक्षण हैं:

– मुंह के भीतर कटने या दांत उखड़ने की वजह से रक्त बहना.

– बिना किसी कारण के नाक से खून बहना.

– किसी जख्म से खून कुछ देर के लिए बंद होने के बाद दोबारा बहने लगना.

जोड़ों मेें रक्तस्राव : घुटनों, कोहनियों आदि जोड़ों में?भीतरी रक्तस्राव बिना किसी चोट के हो सकता है. शुरू में जोड़ों में कसाव आ जाता है पर कोई पीड़ा नहीं होती, खून बहने का कोई निशान भी नहीं होता जोकि दिखाई दे. फिर जोड़ में सूजन आ जाती है, छूने पर वह गरम महसूस होता है. उस जोड़ को घुमानेहिलाने मेें दर्द होता?है. अस्थायी तौर पर जोड़ में कोई क्रिया नहीं हो पाती. जोड़ों में होने वाला रक्तस्राव तत्काल बंद न किया गया तो वह अंग हमेशा के लिए क्षतिग्रस्त हो सकता है.

मस्तिष्क  में रक्तस्राव : दिमाग में रक्तस्राव का होना एक बहुत ही गंभीर समस्या है, जो एक साधारण गुमड़े  से भी हो सकती है या किसी गंभीर चोट से.

रक्तस्राव के लक्षण

– लंबे समय तक रहने वाले तकलीफदेह सिरदर्द या गरदन में पीड़ा या कड़ापन.

– बारबार उलटी होना.

– अचानक कमजोरी होना, बाजुओं या पांवों का बेडौल होना या चलने में तकलीफ होना.

– दोहरी दृष्टि, ऐंठन.

उपचार

हीमोफीलिया के लिए जो मुख्य उपचार है वह रिप्लेसमैंट थेरैपी कहलाता है. इस में मरीज को क्लौटिंग फैक्टर दिया या बदला जाता है. क्लौटिंग फैक्टर 8 (हीमोफीलिया ‘ए’ हेतु) या क्लौटिंग फैक्टर 9 (हीमोफीलिया ‘बी’ हेतु) को धीरेधीरे ड्रिप या इंजैक्शन के माध्यम से नसों में पहुंचाया जाता?है.

एक और उपचार है, जिसे डेस्मोप्रेसिन कहते हैं. यह इंसान द्वारा बनाया गया एक हार्मोन है, जो निम्न से मध्यम स्तर के हीमोफीलिया ‘ए’ के मरीजों को दिया जाता है. इसे हीमोफीलिया ‘बी’ तथा गंभीर हीमोफीलिया ‘ए’ के मरीजों के उपचार के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. इस तरह हीमोफीलिया के मरीजों को आशा नहीं खोनी चाहिए. यदि डाक्टर के निर्देशानुसार उपचार लिया जाए तो इस के रोगी सक्रिय रह कर सारा जीवन जी सकते हैं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *