अब 3,488 किमी लंबी LAC की न‍िगरानी करेगी विशेष पर्वतीय सेना

नई द‍िल्ली। देश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में LAC की न‍िगरानी के लिए अब सेना ने विशेष बल (पर्वतीय) की तैनाती की है। ये जवान पर्वतीय क्षेत्रों के ल‍िए विशिष्ट तौर पर प्रश‍िक्ष‍ित हैं और इन्हें 3,488  किलोमीटर लंबी LAC (वास्तविक नियंत्रण रेखा) पर तैनात किया गया है। सेना ने देश के पश्चिमी, मध्य या पूर्वी सेक्टरों में किसी भी तरह के नियमों का उल्लंघन करने पर नजर रखने के लिए पर्वतीय जवानों को तैनात करने का फैसला क‍िया है।

चीन के पास भी इसका तोड़ नहीं

सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है कि भारतीय सेना को पीएलए द्वारा किसी भी सीमा पार आक्रामकता से LAC की सुरक्षा के लिए निर्देशित किया गया है। जहां पीएलए भारत पर दबाव बढ़ाने के लिए लगातार अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा रहा है। उत्तरी मोर्चे पर लड़ने के लिए पिछले दशकों में प्रशिक्षित विशेष बलों को सरहद पर भेजा गया है। पीएलए के जवान जहां इंफेन्ट्री कॉम्बैट व्हीकल और सड़कों के जरिए चलते हैं, वहीं भारतीय पर्वतीय सेना को गुरिल्ला युद्ध और उच्च ऊंचाई वाले स्थानों पर लड़ने का प्रशिक्षण दिया जाता है। वे कारगिल युद्ध में अपना सामर्थ्य दिखा चुके हैं।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार एक पूर्व भारतीय सेनाध्यक्ष ने कहा, ‘पहाड़ पर लड़ने की कला सबसे कठिन है क्योंकि यहां हताहत होने की संख्या ज्यादा रहती है। उत्तराखंड, लद्दाख, गोरखा, अरुणाचल और सिक्किम के सैनिकों ने दुर्लभ चट्टानों में लड़ाई के कौशल को अपना लिया है और इसलिए उनकी लड़ने की क्षमता की कोई तुलना नहीं है। तोपखाने और मिसाइलों की पिन पॉइंट सटीकता होती है वरना वे मीलों तक पहाड़ पर निशाने से चूक जाएंगे।’

साउथ ब्लॉक में चीन के एक विशेषज्ञ ने कहा, ‘दूसरी चीज जो सेना के लिए काम करेगी वह यह है कि तिब्बती पठार चीन की तरफ समतल है जबकि भारत में यह काराकोरम में के2 चोटी, उत्तराखंड में नंदादेवी, सिक्किम में कंचनजंग और अरुणाचल प्रदेश सीमा के नामचे बरवा से शुरू होती है। पहाड़ों में न केवल क्षेत्र पर कब्जा करना मुश्किल है बल्कि इसपर कब्जा किए रखना भी मुश्किल है।’

एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा, ‘हम भारत के पक्ष में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ट्रंप प्रशासन की आवाजों की सराहना करते हैं। मगर नई दिल्ली का मूड आत्मनिर्भर बनने का है। हम किसी से भी सैन्य या राजनयिक समर्थन लेने की इच्छा नहीं रखते हैं। हमने अपनी बटालियनों को बख्तरबंद कर्मियों के वाहक और तोपखानों के साथ खड़ा किया है। भारत किसी झड़प के लिए न तो उकसाएगा और न उपद्रव करेगा, हां नियमों के हर उल्लंघन का जवाब अवश्य देगा।’

– एजेंसी

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