मानसून सत्र के लिए स्पीकर Sumitra Mahajan ने सांसदों को लिखा भावुक पत्र

‘सांसदों को उनकी नैतिक जिम्मेदारी' की याद दिलाते हुए Sumitra Mahajan ने उनसे सदन में सुचारू कामकाज सुनिश्चित करने की अपील की

नई दिल्‍ली। संसद के मानसून सत्र से पहले लोकसभा अध्यक्ष Sumitra Mahajan ने सांसदों को एक भावुक पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने कहा है कि अगर सांसद अतीत में दूसरे दलों के आचरण का हवाला देते हुए व्यवधान को उचित ठहरायेंगे, तब संसद में ‘व्यवधान का चक्र’ कभी खत्म नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि अब 16वीं लोकसभा के मात्र तीन सत्र बचे हैं और उन्होंने कामकाज में सहयोग के लिए गीता का उद्धरण पेश किया। उधर, केंद्र सरकार ने संसद सत्र के संचालन से पूर्व 17 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलायी है। संसद का मानसून सत्र 18 जुलाई से शुरू होकर 10 अगस्त तक चलेगा और इस दौरान 18 बैठकें होंगी। इसके बाद मौजूदा लोकसभा के दो सत्र शीत व बजट बच जाएंगे।

अध्यक्ष ने कहा कि सांसदों को यह ध्यान रखना चाहिए कि संसद में उनके आचरण और चर्चा की गुणवत्ता का युवाओं के विचारों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। सुमित्रा महाजन ने इस संबंध में श्रीमद भावगत गीता के श्लोक का भी जिक्र किया कि एक नेक व्यक्ति जो कुछ करता है, दूसरे उसका अनुसरण करते हैं।

लोकसभा अध्यक्ष Sumitra Mahajan ने कहा कि समय आ गया है कि हम आत्म चिंतन करें और इस बारे में फैसला करें कि हमारी संसद और लोकतंत्र की छवि के लिए आगे बढ़ने का रास्ता क्या है। सुमित्रा महाजन ने दो पन्नों के पत्र में कहा कि लोकतंत्र के पवित्र मंदिर संसद की प्रतिष्ठा और पवित्रता को अक्षुण्ण एवं सुरक्षित रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा, ‘‘ अपने अनुभव के आधार पर मैं यह कह सकती हूं कि लोग अपने प्रतिनिधियों के कामकाज पर करीबी नजर रखते हैं और मीडिया भी लोगों के समक्ष संसद और संसदीय क्षेत्र में उनके कामकाज की विस्तृत रिपोर्ट पेश करता है।’ लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस सदन का सदस्य बनना विशिष्ट बात है और लोगों को उनसे काफी उम्मीदें हैं और लोगों ने उनमें विश्वास व्यक्त किया है।

सुमित्रा महाजन ने कहा कि इसके बदले में आप न केवल अपने क्षेत्र और देश की उम्मीदों पर खरा उतरें बल्कि देश की प्रगति और लोकतंत्र को मजबूत बनाने में भी योगदान करें। पिछले सत्र के दौरान सदन में सदस्यों के शोर शराबे, तख्तियां दिखाये जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अलग-अलग विचार और असहमति संसदीय मर्यादा एवं मानदंडों के अनुरूप होने चाहिए ताकि लोकतंत्र एवं लोकतांत्रिक संस्थाओं में लोगों का विश्वास कायम रह सके।

Sumitra Mahajan ने कहा कि क्या हम अपने अनुपयुक्त आचरण को अतीत में दूसरे दलों द्वारा कामकाज बाधित करने की दलील देकर उचित ठहरा सकते हैं? अगर इस दलील को स्वीकार कर लिया जाता है तब व्यवधान कभी खत्म नहीं होगा।
-एजेंसी

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