साउथ चाइना सी विवाद: अमेरिका ने कहा, चीन की आपत्ति बेवजह

वॉशिंगटन। साउथ चाइना सी में अमेरिकी और चीनी जहाजों के आमने-सामने आने के मुद्दे पर अमेरिका ने चीन को जवाब दिया है। अमेरिका के मुताबिक चीन का युद्धपोत उसके युद्धपोत के 41 मीटर के दायरे में आ चुका था। अमेरिका का दावा है कि यह यूएन कन्वेंशन के तहत सामान्य प्रक्रिया थी और चीन की आपत्ति बेवजह है। यूएन कन्वेंशन के तहत इस क्षेत्र को ‘द इनोसेंट पेसेज’ का दर्जा दिया गया है, जिसमें एक देश दूसरे देश की समुद्री सीमाओं में कुछ शर्तों के साथ प्रवेश कर सकता है। बता दें कि मंगलवार को दोनों देशों के युद्धपोत काफी नजदीक आ गए थे। इसके बाद दोनों देशों ने एक दूसरे के ऊपर विवाद को भड़काने का आरोप लगाया है। चीन का दावा है कि अमेरिकी सैन्य पोत ने चीन की संप्रभुता का उल्लंघन किया।
क्या है समुद्र का नियम
यह यूएन कन्वेंशन के कुछ सबसे पुराने नियमों में से है। इसके तहत एक देश की समुद्री सीमा क्षेत्र में दूसरे देश का जहाज यदि कुछ आवश्यक शर्तों को पूरा करता है तो प्रवेश कर सकता है। दूसरे देश की सीमाओं में प्रवेश का उद्देश्य अशांति फैलाना, किसी राष्ट्र की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। यह यूएन कन्वेंशन 1958 में प्रभाव में आया था, बाद में इसे 1982 में संशोधित भी किया गया। तीसरी सदी में रोमन धर्मशास्त्री उल्पियन ने कहा था, ‘समुद्र प्राकृतिक रूप से सबके लिए खुला हुआ और स्वतंत्र है।’ यूएन कन्वेंशन ‘द इनोसेंट पेसेज’ का आधार भी यही है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह कानून
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से यह कानून बहुत उपयोगी है। दो राष्ट्रों के बीच यदि किसी तीसरे देश के जहाज को भी निकलना है तो यह कानून इसके लिए मददगार है। इस संधि के तहत किसी राष्ट्र के युद्धपोत भी दूसरे देश की सीमा क्षेत्र से गुजर सकते हैं लेकिन इस दौरान वह एयरक्राफ्ट लॉन्च नहीं कर सकते है। इसके साथ ही कोई राष्ट्र सैन्य इंटेलिजेंस या फिर प्रॉपगैंडा बढ़ाने के लिए इस क्षेत्र का प्रयोग नहीं कर सकते हैं। अमेरिकी युद्धपोत का इनोसेंट पेसेज में प्रवेश कोई पहली घटना नहीं है। 2015 में चीन के 5 युद्धपोत अलाना के निकट अमेरिकी क्षेत्र में आनेवाले समुद्री सीमा से गुजर चुके हैं।
भारत भी इनोसेंट पेसेज का उपयोग कर चुका है। भारतीय नौसेना के समुद्री पोत गहरे समुद्री जल में इस प्रकार की पेट्रोलिंग करते रहे हैं। हालांकि, इस पेट्रोलिंग का उद्देश्य आम तौर पर समुद्री मार्ग के जरिए होनेवाली अंतर्राष्ट्रीय तस्करी को रोकने का ही होता है। म्यांमार, इंडोनेशिया जैसे कुछ राष्ट्रों के साथ भारत संयुक्त सैन्य अभ्यास भी कर चुका है। अमेरिका साउथ चाइना सी में भारत की भागीदारी के लिए भी काफी उत्सुक है।
-एजेंसियां

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