कभी-कभार जीवनसाथी को नजरअंदाज करना भी रिश्ते के लिए फायदेमंद

यह सुनने में भले ही अजीब लगे और शायद आपको आश्चर्य भी हो लेकिन कभी-कभार अपने जीवनसाथी को नजरअंदाज करना भी आपके रिश्ते के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। अब आप सोचेंगे कि यह कैसे संभव है। तो जनाब, इस बारे में बकायदा एक रिसर्च की गई है जिसे जर्नल ऑफ पर्सनैलिटी एंड सोशल साइकोलॉजी में प्रकाशित भी किया गया है। इस रिसर्च के मुताबिक अपने जीवनसाथी की मांग को नजरअंदाज करना लो-इनकम कपल्स यानी कम पैसे वालों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है लेकिन हाई-इनकम कपल्स के रिश्तों पर इस ट्रिक का नकारात्मक असर हो सकता है।
लो-इनकम कपल्स के लिए सही है यह अप्रोच
स्टडी के लीड ऑथर जैकलीन एम रोज कहती हैं, उदारण के लिए- पत्नी पति से कहती है कि वह अपनी नौकरी में अपने लिए वेतन-वृद्धि की मांग करे। पति के लिए कम पैसों में नौकरी करना जहां जॉब सिक्योरिटी कम हो, वेतन-वृद्धि की मांग करना रिस्की सिचुएशन हो सकता है। ऐसे में वेतन-वृद्धि की मांग में अरुचि दिखाकर वह अपने आत्म-सम्मान को भी सुरक्षित रख सकता है और अपने फाइनेंशियल सिचुएशन पर कम जोर दे सकता है। वहीं, अमीर कपल अगर इसी परिस्थिति में हों तो पत्नी को लगेगा कि पति अपने परिवार के लिए थोड़ी सी भी कुर्बानी देने के लिए तैयार नहीं है और इस वजह से उनके रिश्ते में दरार आ सकती है।
रिश्ते में संतुष्टि के लिए सोशियो इकोनॉमिक स्टेटस का भी रोल
स्टडी में शामिल अनुसंधानकर्ता यह जानना चाहते थे कि रिश्ते में संतुष्टि के लिए सोशियो इकोनॉमिक स्टेटस का क्या रोल है। इस स्टडी में पत्नी पर फोकस किया गया जो मांग करने वाली पार्टनर के रोल में थी और पति, मांग को वापस लेने वाले के रोल में। अनुसंधानकर्ताओं ने 18 महीने तक 515 हेट्रोसेक्शुअल कपल्स के साथ एक्सपेरिमेंट किया जिसमें से करीब 40 प्रतिशत कपल्स गरीबी रेखा के नीचे थे। जिन कपल्स के पास आर्थिक सोर्स कम था और उन्होंने डिमांड-विदड्रॉ बिहेवियर का इस्तेमाल किया उनके रिश्ते में सैटिस्फैक्शन स्टेबल बना रहा। वहीं, पैसे वाले कपल्स ने अगर डिमांड-विदड्रॉ नीति को अपनाया तो उनके रिश्ते में सैटिस्फैक्शन यानी संतुष्टि घट गई।
-एजेंसियां

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