कभी करनाल में 200 रुपये प्रति मैच पर खेलते थे नवदीप सैनी

आईपीएल-2019 का एक मैच था रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और चेन्नै सुपर किंग्स के बीच। सीएसके लक्ष्य का पीछा कर रही थी और उसे जीत के लिए महज 71 रन रनों का लक्ष्य मिला था। ओपनर शेन वॉटसन मैदान पर उतर चुके थे। शुरुआत में ही एक खतरनाक बाउंसर, जिसकी रफ्तार 151 किमी प्रतिघंटा थी, वॉटसन के हेल्मेट पर लगी।
दरअसल, ऑस्ट्रेलियाई दिग्गल को गेंद समझ ही नहीं आई थी और वह पूरी तरह स्तब्ध रह गए थे। वह गेंद करने वाले गेंदबाज थे नवदीप सैनी, जिनका वेस्ट इंडीज दौरे के लिए वनडे और टी-20 टीम में चयन हुआ है।
रणजी ट्रॉफी में सैनी दिल्ली के लिए खेलते हैं, हालांकि वह हरियाणा के करनाल से हैं। यही नहीं, बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि एक वक्त ऐसा भी था जब सैनी को करनाल में लोकल टूर्नामेंट में खेलने के 200 रुपये प्रति मैच मिलते थे। एक और रोचक बात यह है कि 2013 तक सैनी लेदर बॉल से नहीं, बल्कि टेनिस बॉल क्रिकेट खेला करते थे।
यूं आए दिल्ली रणजी टीम में
दिल्ली के पूर्व मीडियम पेसर सुमित नरवाल ने करनाल प्रीमियर लीग के दौरान सैनी को देखा तो वह उनकी गति से काफी आकर्षित हुए। सैनी का अगला पड़ाव दिल्ली टीम का नेट सेशन रहा। यहां उन्होंने पूर्व इंटरनेशनल क्रिकेटर गौतम गंभीर को अपनी बॉलिंग से आकर्षित किया। गंभीर ने उन्हें दो जोड़ी जूते दिए और नेट पर लगातार आने को कहा। यहीं से दिल्ली क्रिकेट से सैनी की पहचान शुरू हुई।
उन्हें दिल्ली क्रिकेट टीम में लाने का अहम रोल गौतम गंभीर का रहा। पूर्व रणजी कप्तान ने चयनकर्ताओं को सैनी को रणजी टीम में लेने का सुझाव दिया। 2013-24 सीजन में सैनी टीम में चुन भी लिए गए। यहां से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2017-18 सीजन में दिल्ली को फाइनल तक पहुंचने में सैनी का अहम रोल रहा। वह 8 मैचों में 34 विकेट लेकर टीम के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज भी रहे।
गंभीर ने कहा था, एक दिन भारत के लिए खेलोगे
सैनी को 2018 में जब अफगानिस्तान के खिलाफ इकलौते टेस्ट के लिए पहली बार इंटरनेशनल टीम में शामिल किया गया तो उन्होंने गंभीर को अपना मेंटॉर बताते हुए तारीफ की थी। उन्होंने कहा था कि मैं जब भी गंभीर के बारे में बात करता हूं तो खुद को भावुक पाता हूं। जब मैंने दिल्ली के लिए कुछ मैच खेले तो उन्होंने ही कहा था कि अगर मैं ऐसे ही अच्छा प्रदर्शन और मेहनत करता रहा तो जल्द ही टीम इंडिया के लिए खेलूंगा। उन्होंने मुझे पहचाना, जिसका अंदाजा मुझे भी नहीं था। जब मैं उनकी बातों को सोचता हूं तो खुश होता हूं।
-एजेंसियां

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